नई दिल्ली: कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज से अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा शुरू कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक तनाव के बाद, इस दौरे को आपसी रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने और ‘रीसेट’ करने की एक बड़ी कवायद के रूप में देखा जा रहा है। मार्क कार्नी के साथ एक उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी भारत पहुँच रहा है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार (Trade), स्वच्छ ऊर्जा (Clean Energy) और निवेश (Investment) के क्षेत्रों में सहयोग को नया विस्तार देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएम कार्नी के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सुरक्षा और प्रवासन (Migration) जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
तीन स्तंभों पर टिकी है यह यात्रा
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की इस यात्रा के केंद्र में तीन प्रमुख विषय रहेंगे, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं:
- व्यापार (Trade): दोनों देश एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की दिशा में फिर से बातचीत शुरू कर सकते हैं। कनाडा भारत के लिए दालों और उर्वरकों का बड़ा स्रोत है, जबकि भारत से फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं का निर्यात बढ़ाया जाना है।
- ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन (Energy): कनाडा के पास विशाल प्राकृतिक संसाधन हैं। भारत अपनी स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए कनाडा से ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ और यूरेनियम आपूर्ति के क्षेत्र में दीर्घकालिक समझौतों की उम्मीद कर रहा है।
- निवेश (Investment): कनाडाई पेंशन फंड पहले से ही भारत के बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप्स में अरबों डॉलर का निवेश कर चुके हैं। इस दौरे के दौरान और अधिक एफडीआई (FDI) आकर्षित करने के लिए नई नीतियों पर सहमति बन सकती है।
कूटनीतिक दूरियां मिटाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि मार्क कार्नी का यह दौरा पिछले कुछ वर्षों की कड़वाहट को खत्म करने का एक सुनहरा अवसर है:
- सुरक्षा और आतंकवाद: वार्ता के दौरान भारत की ओर से अपनी सुरक्षा चिंताओं, विशेषकर कट्टरपंथी तत्वों की गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाए जाने की उम्मीद है।
- छात्र और प्रवासन: कनाडा में लाखों भारतीय छात्र और प्रवासी रहते हैं। पीएम कार्नी वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने और भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर अहम बयान दे सकते हैं।
- हिंद-प्रशांत रणनीति: दोनों देश एक स्वतंत्र और खुले ‘इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र के लिए अपनी साझा रणनीति पर चर्चा करेंगे, जो चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और उम्मीदें
मार्क कार्नी, जो पहले बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर रह चुके हैं, अपनी आर्थिक समझ के लिए जाने जाते हैं। उनकी इस पृष्ठभूमि से यह संकेत मिलता है कि यह दौरा राजनीतिक से अधिक ‘आर्थिक लाभ’ पर केंद्रित होगा। दिल्ली पहुंचने के बाद उनका औपचारिक स्वागत राष्ट्रपति भवन में किया जाएगा, जिसके बाद वे राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे।





