देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान, झंडेजी मेले का आगाज आगामी 8 मार्च से होने जा रहा है। गुरु राम राय दरबार साहिब में आयोजित होने वाला यह मेला उत्तर भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस वर्ष मेले का मुख्य आकर्षण ‘दर्शनी गिलाफ’ (पवित्र ध्वज का सबसे बाहरी आवरण) होगा, जिसे चढ़ाने का सौभाग्य इस बार अनिल गोयल के परिवार को प्राप्त हुआ है। मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और देश-विदेश से संगतों का आगमन शुरू हो गया है।
मेले का महत्व और ऐतिहासिक परंपरा
झंडेजी मेला गुरु राम राय महाराज के देहरादून आगमन की स्मृति में मनाया जाता है:
- होली के पांचवें दिन आयोजन: परंपरा के अनुसार, होली के पांचवें दिन (पंचमी तिथि) को दरबार साहिब परिसर में विशाल ध्वज दंड (झंडे जी) का आरोहण किया जाता है।
- सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक: इस मेले में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ भाग लेते हैं, जो दून की साझा संस्कृति को दर्शाता है।
दर्शनी गिलाफ: 100 साल से अधिक की प्रतीक्षा
झंडे जी पर गिलाफ चढ़ाना बेहद पुण्य का कार्य माना जाता है और इसके लिए श्रद्धालुओं को दशकों तक इंतजार करना पड़ता है:
- अनिल गोयल परिवार का सौभाग्य: इस वर्ष देहरादून के प्रसिद्ध व्यवसायी अनिल गोयल का परिवार दर्शनी गिलाफ चढ़ाएगा। दर्शनी गिलाफ वह रेशमी आवरण होता है जो झंडे जी पर सबसे बाहर चढ़ाया जाता है।
- लंबी वेटिंग लिस्ट: दर्शनी गिलाफ चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की सूची बहुत लंबी है। गोयल परिवार को भी इस शुभ अवसर के लिए करीब 100 से अधिक वर्षों के पारिवारिक इंतजार के बाद यह मौका मिला है।
- गिलाफ की तैयारी: यह विशेष गिलाफ अत्यंत महीन रेशम और मखमल से तैयार किया जाता है, जिस पर विशेष कढ़ाई की जाती है।
तैयारियां और सुरक्षा व्यवस्था
दरबार साहिब प्रबंधन और जिला प्रशासन ने मेले के सफल संचालन के लिए कमर कस ली है:
- संगतों का स्वागत: पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और विदेशों से आने वाली ‘संगतों’ (श्रद्धालुओं की टोली) के ठहरने और भोजन के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
- ट्रैफिक प्लान: झंडे जी आरोहण के दिन शहर के प्रमुख मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू रहेगा ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
- सुरक्षा घेरा: मेला क्षेत्र में भारी पुलिस बल और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी जाएगी।





