Tuesday, February 24, 2026

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वैश्विक एआई मंच पर भारत का डंका: प्रधानमंत्री मोदी बोले- ‘पूरी दुनिया ने माना भारत का सामर्थ्य’; एआई को मानव कल्याण का माध्यम बनाने का आह्वान

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आयोजित भव्य ‘ग्लोबल इंडिया एआई समिट’ (Global IndiaAI Summit) में भारत ने आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अपनी बढ़ती शक्ति का जोरदार प्रदर्शन किया है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत के तकनीकी कौशल और एआई को लेकर हमारे विजन की सराहना कर रही है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत एआई का उपयोग केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए कर रहा है।

एआई समिट: भारत की वैश्विक भूमिका

इस शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के तकनीकी दिग्गजों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं ने हिस्सा लिया:

  • नेतृत्वकारी भूमिका: पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि भारत ‘एआई फॉर ऑल’ (AI for All) के सिद्धांत पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य एआई तकनीक को लोकतांत्रिक बनाना है ताकि इसका लाभ केवल कुछ देशों या कंपनियों तक सीमित न रहे।
  • भारत एआई मिशन: प्रधानमंत्री ने ‘इंडिया एआई मिशन’ का जिक्र करते हुए बताया कि सरकार स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों को आधुनिक कंप्यूटिंग क्षमताएं प्रदान करने के लिए भारी निवेश कर रही है।

प्रधानमंत्री के संबोधन के मुख्य बिंदु

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में एआई की संभावनाओं और चुनौतियों दोनों पर बेबाक विचार रखे:

  1. मानव केंद्रित दृष्टिकोण: पीएम ने स्पष्ट किया कि एआई को मानव बुद्धिमत्ता (Human Intelligence) का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि “एआई में ‘ए’ का अर्थ ‘आर्टिफीसियल’ के साथ-साथ ‘एस्पिरेशनल’ (आकांक्षी) भी है।”
  2. अनुवाद और भाषा की बाधा: प्रधानमंत्री ने बताया कि कैसे एआई का उपयोग भारत की भाषाई विविधता को पाटने के लिए किया जा रहा है, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी अपनी भाषा में सरकारी सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।
  3. कृषि और स्वास्थ्य में क्रांति: उन्होंने भविष्य की तस्वीर पेश करते हुए कहा कि एआई के जरिए फसलों की बीमारियों का सटीक अनुमान और स्वास्थ्य सेवाओं में ‘प्रिसिजन मेडिसिन’ के जरिए आम आदमी का जीवन बेहतर बनाया जाएगा

सुरक्षा और नैतिकता पर जोर

तेजी से बढ़ती तकनीक के खतरों को लेकर भी प्रधानमंत्री ने दुनिया को आगाह किया:

  • एआई एथिक्स (Ethical AI): प्रधानमंत्री ने वैश्विक समुदाय से एआई के नैतिक उपयोग के लिए एक साझा ‘वैश्विक फ्रेमवर्क’ बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि डीपफेक और डेटा सुरक्षा जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।
  • विश्वसनीय एआई: भारत ने ‘ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन एआई’ (GPAI) के अध्यक्ष के रूप में यह सुनिश्चित करने का संकल्प दोहराया कि यह तकनीक सुरक्षित और भरोसेमंद हाथों में रहे।

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