गुवाहाटी/ईटानगर: असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच पिछले सात दशकों से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और निर्णायक सफलता हासिल हुई है। दोनों राज्यों की सरकारों ने आपसी सहमति के आधार पर पहला औपचारिक सीमा स्तंभ (Boundary Pillar) स्थापित कर दिया है। यह कदम न केवल दोनों राज्यों के बीच भौगोलिक सीमाओं को स्पष्ट करेगा, बल्कि वर्षों से चल रहे तनाव और अनिश्चितता के माहौल को भी समाप्त करेगा। इस स्तंभ की स्थापना को उत्तर-पूर्व भारत में क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
ऐतिहासिक समझौते का धरातल पर क्रियान्वयन
सीमा स्तंभ की स्थापना कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया का परिणाम है:
- ‘नामसाई घोषणा’ का असर: जुलाई 2022 में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई ‘नामसाई घोषणा’ और उसके बाद अप्रैल 2023 में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक समझौते ने इसकी नींव रखी थी।
- विवादित गांवों पर सहमति: समझौते के तहत दोनों राज्यों ने 123 विवादित गांवों के मुद्दों को सुलझाने पर सहमति व्यक्त की थी। अब उसी समझौते को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहला सीमा स्तंभ?
- विवादों का स्थायी समाधान: सीमा स्पष्ट न होने के कारण अक्सर स्थानीय निवासियों और पुलिस बलों के बीच झड़पें होती थीं। स्तंभ की स्थापना से अब दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे।
- विकास कार्यों में तेजी: सीमा विवाद के कारण कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं (जैसे सड़कें और बिजली लाइनें) रुकी हुई थीं। अब इन क्षेत्रों में सरकारी योजनाएं बिना किसी बाधा के पहुँच सकेंगी।
- भाईचारे को बढ़ावा: यह स्तंभ केवल पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि यह दोनों राज्यों के बीच ‘सह-अस्तित्व’ और ‘सहयोग’ का प्रतीक है।
प्रशासनिक और तकनीकी निगरानी
सीमांकन की इस प्रक्रिया को अत्यंत पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है:
- संयुक्त सर्वेक्षण: भारतीय सर्वेक्षण विभाग (Survey of India) की मदद से अत्याधुनिक जीपीएस तकनीक का उपयोग करके सीमाओं का सटीक निर्धारण किया गया है।
- स्थानीय समितियों की भूमिका: स्तंभ स्थापित करने से पहले क्षेत्रीय समितियों ने दोनों तरफ के ग्रामीणों से संवाद किया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का सामाजिक असंतोष न रहे।
मुख्यमंत्रियों ने जताया संतोष
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के ‘विवाद मुक्त उत्तर-पूर्व’ के विजन की जीत बताया है।
“यह पहला स्तंभ उस भरोसे की दीवार को मजबूत करेगा जो हमने पिछले कुछ वर्षों में मिलकर बनाई है। हम अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।” — असम-अरुणाचल साझा बयान का सार





