ढाका: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने देश की सैन्य संरचना में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किया है। सेना की कमान को अपने नियंत्रण में मजबूत करने और प्रशासनिक सुधारों के उद्देश्य से कई शीर्ष जनरलों के पदभार बदल दिए गए हैं। इस फेरबदल का सबसे चौंकाने वाला पहलू भारत में बांग्लादेश के सैन्य सलाहकार (Military Attaché) के रूप में तैनात वरिष्ठ अधिकारी की तत्काल वापसी है। ढाका से जारी इस आदेश ने कूटनीतिक और रणनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
सैन्य फेरबदल के मुख्य बिंदु
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, सेना के भीतर कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं:
- शीर्ष नेतृत्व में बदलाव: सेना मुख्यालय में तैनात कई वरिष्ठ जनरलों को फील्ड कमांड में भेजा गया है, जबकि कुछ अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) पर भेज दिया गया है।
- प्रमुख पदों पर नई तैनाती: ढाका गैरीसन और खुफिया इकाई (DGFI) के प्रमुख पदों पर प्रधानमंत्री के विश्वसनीय अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।
- भारत से वापसी: भारत में बांग्लादेशी उच्चायोग में तैनात सैन्य सलाहकार को अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही ढाका वापस लौटने का निर्देश दिया गया है।
क्यों अहम है सैन्य सलाहकार की वापसी?
किसी भी देश के सैन्य सलाहकार का पद दूसरे देश के साथ रक्षा सहयोग और खुफिया तालमेल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है:
- रणनीतिक बदलाव: जानकारों का मानना है कि भारत से सलाहकार को वापस बुलाना बांग्लादेश की नई सरकार की विदेश नीति में संभावित बदलाव का संकेत हो सकता है।
- विश्वास का संकट: नई सरकार उन अधिकारियों को हटाने की प्रक्रिया में है जिन्हें पिछली सरकार का करीबी माना जाता था। वापस बुलाए गए अधिकारी को पूर्ववर्ती शासन के दौरान भारत के साथ मजबूत रक्षा संबंधों का सूत्रधार माना जाता था।
- रक्षा संबंधों पर असर: भारत और बांग्लादेश के बीच सैन्य प्रशिक्षण और हथियारों की आपूर्ति को लेकर कई समझौते पाइपलाइन में हैं। ऐसे में इस पद का खाली होना या नए अधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया इन समझौतों की गति को प्रभावित कर सकती है।
पीएम तारिक का रुख: “सेना में सुधार जरूरी”
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने इस फेरबदल को ‘नियमित प्रक्रिया’ बताते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है:
- पारदर्शिता का दावा: सरकार का तर्क है कि सेना को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करने और पेशेवर बनाने के लिए यह कदम उठाए गए हैं।
- सुरक्षा चुनौतियों पर ध्यान: सीमा सुरक्षा और आंतरिक शांति बनाए रखने के लिए कमांड स्ट्रक्चर में बदलाव को अपरिहार्य बताया गया है।
कूटनीतिक असर और भविष्य की दिशा
बांग्लादेश में हो रहे इन बदलावों पर भारत के रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की पैनी नजर है।
- भारत की प्रतिक्रिया: आधिकारिक तौर पर भारत ने इसे बांग्लादेश का ‘आंतरिक मामला’ बताया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, दिल्ली इस बात का विश्लेषण कर रही है कि नई नियुक्तियां द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को किस दिशा में ले जाएंगी।
- क्षेत्रीय स्थिरता: दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिहाज से बांग्लादेश की सेना में स्थिरता और भारत के साथ उसका समन्वय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।





