कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संस्थापक सदस्यों में से एक और राज्य की राजनीति में ‘चाणक्य’ के नाम से मशहूर दिग्गज नेता मुकुल रॉय का सोमवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कोलकाता के एक निजी अस्पताल में उनका उपचार जारी था। 70 वर्षीय रॉय पिछले कुछ वर्षों से मस्तिष्क संबंधी बीमारी और अन्य शारीरिक जटिलताओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
ममता के सबसे खास सिपहसालार से ‘चाणक्य’ बनने का सफर
मुकुल रॉय को पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को सत्ता के शिखर तक पहुँचाने वाले सबसे प्रमुख रणनीतिकारों में गिना जाता है:
- TMC की नींव: 1998 में जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस बनाई, तो मुकुल रॉय उनके सबसे भरोसेमंद साथी थे। वे पार्टी के पहले अखिल भारतीय महासचिव बने।
- रणनीतिक कौशल: उन्हें संगठन का जादूगर माना जाता था। पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ उनका सीधा जुड़ाव था, जिसके चलते उन्हें ‘बंगाल का चाणक्य’ कहा जाने लगा।
- रेल मंत्री का पद: मनमोहन सिंह सरकार के दौरान उन्होंने देश के रेल मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं।
सियासी उतार-चढ़ाव और भाजपा का सफर
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जिसने बंगाल की राजनीति की दिशा कई बार बदली:
- भाजपा में शामिल होना: 2017 में ममता बनर्जी से मतभेदों के बाद उन्होंने TMC छोड़ दी और भाजपा का दामन थाम लिया। बंगाल में भाजपा को एक मजबूत शक्ति बनाने और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को 18 सीटें दिलाने में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है।
- घर वापसी: 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद वे फिर से तृणमूल कांग्रेस में लौट आए थे। हालांकि, इसके बाद से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरने लगा और वे सक्रिय राजनीति से दूर होते गए।
ममता बनर्जी और राजनीतिक हस्तियों ने जताया शोक
मुकुल रॉय के निधन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा:
“मुकुल रॉय के निधन की खबर सुनकर अत्यंत दुखी हूँ। वे हमारे शुरुआती दिनों के साथी थे और संगठन के निर्माण में उनका योगदान अविस्मरणीय है। यह मेरी व्यक्तिगत क्षति है। उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं।”
राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस और भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी रॉय के निधन को बंगाल की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
अंतिम दर्शन और विदाई
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, मुकुल रॉय का पार्थिव शरीर उनके आवास पर अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा, जहाँ पार्टी कार्यकर्ता और आम जनता उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेंगे। इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।





