Friday, February 20, 2026

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सीमा पर ‘रोबोट आर्मी’ तैनात करने की फिराक में चीन? ट्रेनिंग का वीडियो हुआ वायरल; रक्षा विशेषज्ञों की जांच में सामने आई असलियत

बीजिंग/नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर हाल ही में वायरल हुए एक वीडियो ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। इस वीडियो में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवानों के साथ मशीनगन से लैस ‘रोबोटिक डॉग्स’ (Robotic Dogs) और इंसानों जैसे दिखने वाले ‘ह्यूमनॉइड रोबोट्स’ को युद्धाभ्यास करते हुए दिखाया गया है। दावा किया जा रहा है कि चीन जल्द ही भारत और अन्य पड़ोसी देशों से लगी अपनी सीमाओं पर एक ‘रोबोट आर्मी’ तैनात करने जा रहा है। हालांकि, इस दावे और वीडियो की गहराई से की गई जांच में कुछ ऐसी सच्चाई सामने आई है, जो चीन के इस ‘प्रोपेगैंडा’ की पोल खोलती नजर आती है।

क्या है वायरल वीडियो में? (चीन का शक्ति प्रदर्शन)

चीनी सरकारी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित इस वीडियो में भविष्य के युद्ध की एक झलक दिखाई गई है:

  • सशस्त्र रोबोटिक डॉग्स: वीडियो में चार पैरों वाले रोबोट्स को ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर दौड़ते और उनकी पीठ पर लगी असॉल्ट राइफल्स से सटीक निशाना लगाते हुए दिखाया गया है।
  • शहरी युद्ध का अभ्यास: रोबोट्स को इमारतों के भीतर घुसकर आतंकवादियों या दुश्मनों को खत्म करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
  • कमांड कंट्रोल: इन रोबोट्स को पीछे बैठे सैनिक रिमोट कंट्रोल या टैबलेट के जरिए संचालित कर रहे हैं।

जांच में खुली पोल: हकीकत या सिर्फ ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’?

जब अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों और स्वतंत्र जांच एजेंसियों ने इस वीडियो का तकनीकी विश्लेषण किया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं:

  1. बैटरी और स्टेबिलिटी की समस्या: जांच में पाया गया कि ये रोबोट अत्यधिक ठंडे और कम ऑक्सीजन वाले पहाड़ी इलाकों (जैसे लद्दाख या अरुणाचल सीमा) में काम करने के लिए फिलहाल सक्षम नहीं हैं। इनकी बैटरी लाइफ मात्र 2 से 4 घंटे है, जो सीमा पर लंबी तैनाती के लिए नाकाफी है।
  2. जटिल रास्तों पर विफलता: वीडियो में जिन रोबोट्स को दिखाया गया है, वे समतल मैदानों या कृत्रिम बाधाओं पर तो ठीक चल रहे हैं, लेकिन हिमालय के ऊंचे और फिसलन भरे दर्रों पर उनका संतुलन बिगड़ना तय है।
  3. महज एक ‘प्रोटोटाइप’: विशेषज्ञों का मानना है कि यह वीडियो चीन की ‘साइकलॉजिकल वॉरफेयर’ (मनोवैज्ञानिक युद्ध) की रणनीति का हिस्सा है। चीन यह दिखाना चाहता है कि वह तकनीक में अमेरिका से आगे निकल गया है, जबकि वास्तव में ये रोबोट अभी परीक्षण के शुरुआती चरण में हैं।

चीन की मंशा: सैनिकों के नुकसान को कम करना

भले ही वर्तमान में ये रोबोट पूरी तरह तैनात होने के लिए तैयार न हों, लेकिन चीन इस दिशा में भारी निवेश कर रहा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  • हताहतों की संख्या घटाना: सीमा पर झड़पों के दौरान अपने सैनिकों की जान बचाने के लिए चीन अग्रिम पंक्ति में मशीनों को रखना चाहता है।
  • निगरानी (Surveillance): चीन इन रोबोट्स का उपयोग मुख्य रूप से उन दुर्गम गुफाओं और दर्रों की रेकी करने के लिए करना चाहता है, जहां इंसानों का पहुंचना जोखिम भरा है।
  • एआई एकीकरण: चीन अपनी सेना को ‘इन्फोर्मेटाइज्ड’ से ‘इंटेलिजेंटाइज्ड’ (AI आधारित) बनाने के विजन पर काम कर रहा है।

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