नई दिल्ली: देश के कॉर्पोरेट और टैक्स जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक प्रसिद्ध बिरयानी चेन और उससे जुड़े रेस्टोरेंट नेटवर्क में 70,000 करोड़ रुपये के महाघोटाले का खुलासा हुआ। यह कोई सामान्य छापेमारी नहीं थी, बल्कि इसे अंजाम दिया गया अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स के जरिए। आयकर विभाग और जीएसटी इंटेलिजेंस ने बिरयानी चेन के 60 टेराबाइट (TB) से अधिक बिलिंग डेटा का विश्लेषण कर इस काले खेल को उजागर किया है। यह मामला इस बात का प्रमाण है कि अब डिजिटल युग में टैक्स चोरी करना नामुमकिन होता जा रहा है।
कैसे पकड़ी गई चोरी? (डेटा का पहाड़ और AI की नजर)
इस घोटाले का जाल 1.7 लाख से अधिक रेस्टोरेंट्स और आउटलेट्स तक फैला हुआ था। जांच एजेंसियों ने इसे पकड़ने के लिए जिस प्रक्रिया का पालन किया, वह किसी जासूसी फिल्म से कम नहीं है:
- 60 TB डेटा का विश्लेषण: जांच टीम के पास बिलों, कच्चे कागजात और डिजिटल ट्रांजेक्शन का 60 टेराबाइट डेटा था। किसी इंसान के लिए इसे चेक करना सालों का काम था, जिसे AI ने कुछ ही घंटों में कर दिखाया।
- बिरयानी की प्लेट और चावल का गणित: AI एल्गोरिदम ने रेस्टोरेंट द्वारा खरीदे गए कच्चे माल (जैसे चावल, मांस और मसाले) की मात्रा और बेची गई बिरयानी की प्लेटों के बीच भारी अंतर पकड़ा। डेटा से पता चला कि कागजों पर बिक्री बहुत कम दिखाई गई थी, जबकि कच्चे माल की खरीद रिकॉर्ड तोड़ थी।
- पैटर्न रिकग्निशन: AI ने उन पैटर्न को पकड़ा जहां एक ही समय पर कई फर्जी बिल जेनरेट किए गए थे ताकि कैश ट्रांजेक्शन को छुपाया जा सके।
घोटाले का तरीका: ‘कच्चे बिल’ और ‘फर्जी इनपुट टैक्स’
बिरयानी चेन ने टैक्स बचाने के लिए मुख्य रूप से दो तरीके अपनाए थे:
- समानांतर बिलिंग (Parallel Billing): ग्राहकों को दिए जाने वाले बिल ‘कच्चे’ होते थे जो मुख्य सर्वर पर दर्ज ही नहीं किए जाते थे। इससे होने वाली करोड़ों की कमाई का कोई रिकॉर्ड सरकारी फाइल में नहीं आता था।
- फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): जांच में पाया गया कि चेन ने हजारों ऐसी फर्जी कंपनियों से बिल लिए थे जो अस्तित्व में ही नहीं थीं। इन बिलों के जरिए भारी-भरकम ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ का दावा कर सरकार को चूना लगाया गया।
1.7 लाख रेस्टोरेंट्स के नेटवर्क की जांच
जांच का दायरा केवल एक शहर तक सीमित नहीं था। AI की मदद से पूरे देश में फैले 1.7 लाख छोटे-बड़े रेस्टोरेंट्स की सेल रिपोर्ट्स को ट्रैक किया गया। जिन आउटलेट्स पर बिक्री और खर्च का मिलान नहीं हुआ, वहां तत्काल रेड की गई। अधिकारियों का कहना है कि इस घोटाले की जड़ें बहुत गहरी थीं और कई शेल कंपनियां (Shell Companies) इसके पीछे काम कर रही थीं।





