Tuesday, February 17, 2026

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आसमान में गरजेगा भारत: तेजस, राफेल और सुखोई की जुगलबंदी से फिर कांपेगा पाकिस्तान

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी मारक क्षमता और युद्ध कौशल का लोहा मनवाने के लिए एक बार फिर तैयार है। सीमा पार और पड़ोसी मुल्कों की हरकतों पर नकेल कसने के लिए वायुसेना एक मेगा युद्धाभ्यास की योजना बना रही है, जिसकी तुलना ऐतिहासिक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की आक्रामकता से की जा रही है। इस अभ्यास में भारत के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान— राफेल (Rafale), सुखोई-30 MKI (Sukhoi), और स्वदेशी तेजस (Tejas)— अपनी सामूहिक ताकत का प्रदर्शन करेंगे। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्धाभ्यास न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन को भी भारत की ‘टू-फ्रंट वार’ (दो मोर्चों पर युद्ध) की तैयारी का कड़ा संदेश देगा।

क्या है वायुसेना का ‘एक्शन प्लान’?

इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य ‘ज्वाइंट कॉम्बैट ऑपरेशंस’ (संयुक्त युद्ध अभियान) की सटीकता को परखना है। प्लान की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • राफेल की लीडरशिप: हवा से हवा में लंबी दूरी तक मार करने वाली ‘मिटियोर’ मिसाइलों से लैस राफेल विमान इस ऑपरेशन की कमान संभालेंगे।
  • तेजस का दम: स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ को कम ऊँचाई पर दुश्मन के रडार को चकमा देने और सटीक बमबारी करने की भूमिका सौंपी गई है।
  • सुखोई का सुरक्षा कवच: सुखोई-30 MKI अपनी विशाल रेंज और भारी पेलोड क्षमता के साथ गहरे हमले (Deep Strike) करने का अभ्यास करेंगे।
  • नेटवर्क केंद्रित युद्ध: इसमें अवाक्स (AWACS) और रिफ्यूलर विमानों का उपयोग कर यह परखा जाएगा कि भारतीय विमान कितनी देर तक दुश्मन की सीमा के पास डटे रह सकते हैं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ की यादें ताजा: क्यों डरा है पाकिस्तान?

इतिहास गवाह है कि जब भी भारतीय वायुसेना ने बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास किया है, सीमा पार खलबली मच गई है:

  1. मनोवैज्ञानिक दबाव: जिस तरह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेनाओं ने आक्रामक रुख अपनाया था, उसी तर्ज पर इस बार भी एलओसी (LoC) के पास वायुसेना की हलचल ने पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है।
  2. सटीक मारक क्षमता: बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान को भारतीय वायुसेना के ‘सरप्राइज एलिमेंट’ का डर सताता रहता है। राफेल के बेड़े में शामिल होने के बाद भारत की हवाई शक्ति कई गुना बढ़ गई है।
  3. स्वदेशी ताकत: पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चिंता भारत की स्वदेशी तकनीक (तेजस और ब्रह्मोस मिसाइल) है, जिसका काट उनके पास फिलहाल मौजूद नहीं है।

रात के अंधेरे में भी होगा वार

इस युद्धाभ्यास का एक बड़ा हिस्सा ‘नाइट कॉम्बैट’ (रात में युद्ध) पर केंद्रित होगा:

  • अत्याधुनिक रडार: अंधेरे में भी दुश्मन के ठिकानों को खोजने और उन्हें नष्ट करने के लिए आधुनिक इन्फ्रारेड और रडार तकनीक का परीक्षण किया जाएगा।
  • मिसाइल टेस्टिंग: अभ्यास के दौरान हवा से जमीन पर मार करने वाली कई नई मिसाइलों के परीक्षण की भी संभावना है।

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