वाशिंगटन/मिशिगन: अमेरिका में गन कल्चर (बंदूक संस्कृति) का कहर एक बार फिर मासूम बच्चों और निर्दोष नागरिकों पर टूटा है। एक स्थानीय स्कूल के हॉकी मैच के दौरान हुई भीषण गोलीबारी में एक बच्ची और एक वयस्क की मौत हो गई। इस हमले ने खेल के उत्साह को पल भर में मातम और दहशत में बदल दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावर ने वारदात को अंजाम देने के बाद खुद को भी गोली मार ली, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने पूरे अमेरिका में एक बार फिर स्कूली सुरक्षा और सख्त गन कंट्रोल कानूनों की बहस को छेड़ दिया है।
हादसे का मंजर: खुशियों के बीच अचानक गूंजी गोलियां
यह घटना उस समय हुई जब स्कूल के स्टेडियम में बच्चों का हॉकी मैच चल रहा था और बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए वहां मौजूद थे:
- अचानक हमला: मैच के दौरान ही एक हथियारबंद व्यक्ति ने स्टैंड की ओर आकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी से स्टेडियम में भगदड़ मच गई।
- मासूमों पर वार: गोलियों की चपेट में आने से एक छोटी बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया।
- हमलावर की आत्महत्या: पुलिस के पहुँचने से पहले ही हमलावर ने अपनी रिवॉल्वर से खुद के सिर में गोली मार ली।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई: जांच में जुटे अधिकारी
सूचना मिलते ही स्वात (SWAT) टीम और स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी:
- इलाके की तलाशी: पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या हमलावर अकेला था या उसके साथ कोई और भी शामिल था। हालांकि, शुरुआती जांच में इसे एक ‘लोन वुल्फ’ हमला माना जा रहा है।
- हमलावर की पहचान: पुलिस ने हमलावर की पहचान गुप्त रखी है, लेकिन सूत्रों के अनुसार वह पूर्व में भी कुछ आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा था। हमले के पीछे का सटीक मकसद अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
- घायलों की स्थिति: इस गोलीबारी में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज नजदीकी ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है।
गहराता गन कल्चर का संकट
अमेरिका में स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली गोलीबारी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं:
- सुरक्षा पर सवाल: इस घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एक स्कूली खेल प्रतियोगिता में कोई व्यक्ति हथियार लेकर कैसे प्रवेश कर गया।
- राजनीतिक प्रतिक्रिया: राष्ट्रपति और अन्य बड़े नेताओं ने इस घटना पर शोक व्यक्त किया है। मानवाधिकार संगठनों ने एक बार फिर मांग की है कि हथियारों की बिक्री को लेकर संघीय कानूनों में कड़े बदलाव किए जाएं।




