नैनीताल/नई दिल्ली: आज दुनिया एक अद्भुत खगोलीय घटना की साक्षी बनने जा रही है। आसमान में चंद्रमा, सूर्य को इस तरह ढकेगा कि सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकती हुई अंगूठी की तरह नजर आएगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ (Annular Solar Eclipse) कहा जाता है। इस घटना को लेकर न केवल आम जनता बल्कि वैज्ञानिक जगत में भी भारी उत्साह है। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ सौर विज्ञानी ने इस ग्रहण की बारीकियों और भारत के सौर मिशन ‘आदित्य एल-वन’ (Aditya L-1) की भूमिका पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
कहां और कैसे दिखेगा ‘रिंग ऑफ फायर’?
खगोलविदों के अनुसार, यह ग्रहण दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में दिखाई देगा:
- अंगूठी सा नजारा: जब चंद्रमा सूर्य के ठीक बीच में आ जाता है और सूर्य का केवल बाहरी किनारा दिखाई देता है, तो इसे ‘वलयाकार सूर्य ग्रहण’ कहते हैं। इसी दृश्य को ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
- दृश्यता: यह अद्भुत नजारा मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका, प्रशांत महासागर और अटलांटिक के कुछ हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक अत्याधुनिक उपकरणों के जरिए इस पर नजर रखेंगे।
- समय: ग्रहण की शुरुआत भारतीय समयानुसार आज शाम से होगी और देर रात तक चलेगी।
आदित्य एल-वन की ‘कमांडो नजर’: नैनीताल के विज्ञानी का खुलासा
नैनीताल (एरीज) के सौर विज्ञानी ने बताया कि भले ही यह ग्रहण भारत में न दिखे, लेकिन अंतरिक्ष में मौजूद भारत का सौर वेधशाला ‘आदित्य एल-वन’ इसके अध्ययन में बड़ी भूमिका निभाएगा:
- एल-वन पॉइंट का फायदा: आदित्य एल-वन पृथ्वी और सूर्य के बीच ‘लैग्रेंज पॉइंट-1’ पर स्थित है। यहाँ से यह बिना किसी बाधा के 24 घंटे सूर्य को देख सकता है। ग्रहण के दौरान भी यह सूर्य की गतिविधियों को निरंतर रिकॉर्ड करेगा।
- कोरोना का अध्ययन: ग्रहण के समय सूर्य का बाहरी वातावरण (कोरोना) स्पष्ट नजर आता है। आदित्य एल-वन के उपकरण (VLEC और अन्य पेलोड्स) इस दौरान निकलने वाली सौर लपटों और चुंबकीय विकिरणों का सूक्ष्म विश्लेषण करेंगे।
- वैज्ञानिक डेटा: विज्ञानी के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूर्य के प्रकाश में होने वाले बदलावों से सौर हवाओं (Solar Winds) की गति और उनके तापमान को समझने में नई मदद मिलेगी।
सावधानी की अपील: नग्न आंखों से न देखें सूर्य
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि चाहे ग्रहण पूर्ण हो या वलयाकार, सूर्य की ओर सीधे देखना आंखों के लिए घातक हो सकता है:
- विशेष चश्मों का प्रयोग: ग्रहण देखने के लिए ‘सोलर फिल्टर’ या विशेष रूप से प्रमाणित चश्मों का ही उपयोग करें।
- कैमरा और दूरबीन: बिना उचित फिल्टर के कैमरा या दूरबीन से सूर्य की ओर देखने से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।





