Tuesday, February 17, 2026

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हड्डियां गलाने वाली ठंड पर भारी पड़ा BRO का जज्बा: -15°C में भी नहीं थमे कदम, फरवरी में ही खोल दिया ‘आदि कैलाश’ यात्रा मार्ग

पिथौरागढ़ (धारचूला): सीमा सड़क संगठन (BRO) के कर्मयोगियों ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता और अदम्य साहस का परिचय देते हुए इतिहास रच दिया है। चीन सीमा को जोड़ने वाले सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण और आस्था के केंद्र ‘आदि कैलाश’ यात्रा मार्ग को फरवरी माह में ही यातायात के लिए खोल दिया गया है। आम तौर पर अप्रैल या मई तक बर्फ की मोटी चादर में लिपटे रहने वाले इस मार्ग को BRO ने भीषण ठंड और शून्य से 15 डिग्री नीचे (-15°C) के जमा देने वाले तापमान के बीच कड़ी मशक्कत कर बहाल किया है। इस उपलब्धि के बाद सीमावर्ती गांवों और सुरक्षा बलों के लिए रसद और आवाजाही का रास्ता सुलभ हो गया है।

विनाशकारी बर्फबारी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां

उच्च हिमालयी क्षेत्रों में इस वर्ष हुई भारी बर्फबारी के कारण गुंजी-कुटी-जोलिंगकांग मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था:

  • हाड़ कंपाने वाली ठंड: समुद्र तल से 14,000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर तापमान -15°C तक गिर गया था, जहाँ मशीनों का डीजल जमना और ऑक्सीजन की कमी एक बड़ी चुनौती थी।
  • बर्फ की ऊंची दीवारें: कई स्थानों पर सड़क पर 10 से 15 फीट ऊंची बर्फ की दीवारें खड़ी थीं। BRO के जवानों ने अत्याधुनिक स्नो कटर और भारी मशीनों के जरिए दिन-रात काम कर इन बाधाओं को दूर किया।
  • जोखिम भरा कार्य: खड़ी ढलानों और हिमस्खलन (एवलांच) के खतरे के बीच ऑपरेटरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मार्ग प्रशस्त किया।

फरवरी में मार्ग खुलने के मायने और लाभ

आदि कैलाश मार्ग का समय से पहले खुलना कई मायनों में ऐतिहासिक और लाभकारी है:

  1. सामरिक मजबूती: यह सड़क सीमा पर तैनात भारतीय सेना और आईटीबीपी (ITBP) के जवानों के लिए ‘लाइफलाइन’ है। रास्ता जल्दी खुलने से चौकियों तक रसद और हथियारों की आपूर्ति आसान हो जाएगी।
  2. स्थानीय ग्रामीणों को राहत: व्यास घाटी के उच्च हिमालयी गांवों के लोग, जो सर्दियों में निचले इलाकों में आ जाते हैं, अब समय से पहले अपने पुश्तैनी गांवों की ओर रुख कर सकेंगे।
  3. पर्यटन और तीर्थयात्रा: ‘आदि कैलाश’ और ‘ओम पर्वत’ के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह एक सुखद संकेत है। मार्ग जल्दी खुलने से इस वर्ष यात्रा सीजन लंबा और सुगम होने की उम्मीद है।

BRO का संकल्प: ‘श्रमेण सर्वं साध्यम्’

संगठन के अधिकारियों ने इस सफलता का श्रेय अपने जमीनी स्तर पर काम करने वाले ‘कैजुअल पेड लेबर्स’ (CPL) और मशीन ऑपरेटरों को दिया है:

  • अत्याधुनिक तकनीक: इस बार मार्ग खोलने के लिए BRO ने उन्नत ‘स्नो ब्लोअर’ तकनीक का उपयोग किया, जिससे बर्फ हटाने की गति दोगुनी हो गई।
  • अदम्य साहस: अधिकारी बताते हैं कि सुबह के समय तापमान इतना कम होता है कि औजारों को हाथ लगाना भी मुश्किल होता है, लेकिन जवानों के हौसले के आगे कुदरत की चुनौतियां भी छोटी पड़ गईं।

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