देहरादून: देवभूमि की सुरक्षा और शांति व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने पूरे प्रदेश में एक व्यापक सत्यापन अभियान (Verification Drive) शुरू किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कड़े रुख के बाद, पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में रह रहे बाहरी व्यक्तियों, किरायेदारों, घरेलू सहायकों और विशेष रूप से ‘डिलीवरी एजेंटों’ की गहन जांच करें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राज्य की जनसांख्यिकी (Demography) में आ रहे बदलावों पर नजर रखना और छिपे हुए संदिग्ध तत्वों को बाहर निकालना है।
अभियान के मुख्य बिंदु: किन पर होगी कड़ी नजर?
पुलिस ने इस अभियान को बहु-स्तरीय बनाया है ताकि कोई भी संदिग्ध जांच के दायरे से बाहर न रहे:
- किरायेदारों का भौतिक सत्यापन: मकान मालिकों के लिए अब अनिवार्य होगा कि वे अपने किरायेदारों का पूरा ब्योरा नजदीकी थाने में दें। बिना सत्यापन के किरायेदार रखने वाले मकान मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
- डिलीवरी एजेंटों की जांच: ऑनलाइन फूड और कूरियर कंपनियों से जुड़े डिलीवरी बॉयज का भी सत्यापन किया जा रहा है। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि इन सेवाओं की आड़ में कोई अपराधी शहर में सक्रिय न हो।
- संदिग्धों की धरपकड़: रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थानों पर संदिग्ध रूप से घूम रहे लोगों से पूछताछ की जा रही है और उनके पहचान पत्रों का मिलान उनके मूल राज्यों के डेटाबेस से किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री का विजन: सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है:
- अपराध पर लगाम: सत्यापन के जरिए बाहरी राज्यों से आकर यहाँ छिपने वाले अपराधियों को पकड़ना आसान होगा।
- धार्मिक स्थलों की सुरक्षा: चारधाम यात्रा मार्ग और प्रमुख तीर्थ नगरों (हरिद्वार, ऋषिकेश) में विशेष टीमें तैनात की गई हैं, जो होटलों और धर्मशालाओं में रुके लोगों की जांच कर रही हैं।
- जनसांख्यिकी सुरक्षा: अवैध रूप से बसे बाहरी लोगों की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया जा रहा है, ताकि राज्य की आंतरिक सुरक्षा को कोई खतरा न हो।
मकान मालिकों और व्यापारियों के लिए निर्देश
पुलिस महानिदेशक (DGP) ने आम जनता से इस अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कुछ महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:
- ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग: सत्यापन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए पुलिस के ‘उत्तराखंड पुलिस ऐप’ का उपयोग किया जा सकता है, जहाँ घर बैठे विवरण अपलोड किया जा सकता है।
- दोषियों पर जुर्माना: सत्यापन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत 10,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।





