ढाका/नई दिल्ली: पड़ोसी देश बांग्लादेश की राजनीति में आ रहे बड़े बदलावों के बीच भारत के साथ रिश्तों को लेकर एक नई और सकारात्मक तस्वीर उभरती दिख रही है। बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक शक्ति बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारत को लेकर अपने कड़े रुख में नरमी लाते हुए ‘साफ मैसेज’ दिया है कि वह भारत के साथ मजबूत और स्थिर संबंध चाहती है। राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव के गहरे मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि परंपरागत रूप से बीएनपी को पाकिस्तान के करीब और भारत का आलोचक माना जाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दोस्ती आगे बढ़ती है, तो आने वाले समय में बांग्लादेश की पाकिस्तान से दूरियां बढ़ सकती हैं।
BNP का बदला रुख: विरोध के बजाय सहयोग पर जोर
हाल के घटनाक्रमों में बीएनपी के शीर्ष नेतृत्व ने भारत के प्रति अपने नजरिए में बदलाव के स्पष्ट संकेत दिए हैं:
- सुरक्षा और स्थिरता का आश्वासन: बीएनपी ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यह भारत की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- आर्थिक हितों को प्राथमिकता: पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बांग्लादेश के आर्थिक विकास के लिए भारत के साथ व्यापारिक और कनेक्टिविटी समझौते अनिवार्य हैं।
- अल्पसंख्यक सुरक्षा: बीएनपी ने यह भी संदेश दिया है कि वे बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, जो भारत के लिए हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।
क्या पाकिस्तान से कम होगा प्रभाव? रणनीतिक बदलाव के संकेत
बीएनपी की इस नई कूटनीति का सीधा असर पाकिस्तान के साथ उसके ऐतिहासिक संबंधों पर पड़ सकता है:
- इतिहास से सबक: बांग्लादेश की जनता के बीच पाकिस्तान विरोधी भावनाएं (1971 के संदर्भ में) आज भी गहरी हैं। बीएनपी अब अपनी छवि को एक ‘प्रो-बांग्लादेश’ पार्टी के रूप में स्थापित करना चाहती है, न कि पाकिस्तान समर्थक।
- क्षेत्रीय कूटनीति: दक्षिण एशिया में चीन और भारत की सक्रियता के बीच, पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था और वैश्विक साख ने उसे बांग्लादेश के लिए एक कम आकर्षक विकल्प बना दिया है।
- आतंकवाद पर कड़ा रुख: भारत के साथ दोस्ती बनाए रखने के लिए बीएनपी को उन कट्टरपंथी तत्वों से दूरी बनानी होगी जिन्हें अक्सर पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त होता है।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
भारत हमेशा से एक स्थिर और मित्रवत बांग्लादेश का पक्षधर रहा है। बीएनपी के इस बदले व्यवहार से भारत को निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं:
- कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स: पूर्वोत्तर राज्यों (Seven Sisters) तक पहुँचने के लिए बांग्लादेश से मिलने वाला ट्रांजिट और ट्रांसशिपमेंट सहयोग और अधिक सुगम हो सकता है।
- सीमा सुरक्षा: सीमा पार तस्करी और उग्रवाद को रोकने में दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल की उम्मीद है।
- चीन के प्रभाव पर लगाम: यदि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते मजबूत होते हैं, तो क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलेगी।





