जोशीमठ (चमोली): विश्व प्रसिद्ध हिम क्रीड़ा केंद्र औली की बर्फीली ढलानें एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए तैयार हैं। शनिवार से औली में राष्ट्रीय स्की एवं स्नोबोर्ड चैंपियनशिप का विधिवत शुभारंभ हो गया है। इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों और सेना की टीमों के सैकड़ों स्कीयर औली पहुँचे हैं। बर्फ की सफेद चादर से ढकी चोटियों पर खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश के सैलानी भी औली में उमड़ पड़े हैं।
प्रतियोगिता का मुख्य आकर्षण: बर्फ पर बिजली सी रफ्तार
चैंपियनशिप के पहले दिन विभिन्न श्रेणियों में रोमांचक मुकाबले आयोजित किए गए:
- दिग्गज टीमों की भागीदारी: भारतीय सेना (HAWS), आईटीबीपी (ITBP) सहित हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है।
- प्रमुख स्पर्धाएं: प्रतियोगिता में जाइंट स्लैलम, स्लैलम और स्नोबोर्डिंग जैसी तकनीकी स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं, जहाँ स्कीयर अपनी कुशलता और गति का प्रदर्शन कर रहे हैं।
- सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: ढलानों पर खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ (SDRF) और मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी चोट या आपात स्थिति में तुरंत मदद दी जा सके।
पर्यटन को लगा पंख: होटल और होम-स्टे हुए फुल
इस राष्ट्रीय आयोजन ने स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है:
- सैलानियों का उत्साह: चैंपियनशिप के चलते औली और जोशीमठ के सभी होटल, रिजॉर्ट और होम-स्टे पूरी तरह से बुक हो चुके हैं। पर्यटकों के लिए स्कीइंग के साथ-साथ नंदा देवी और द्रोणागिरी जैसी चोटियों का दीदार भी मुख्य आकर्षण बना हुआ है।
- स्थानीय रोजगार: घोड़ा-खच्चर संचालक, स्थानीय गाइड और टैक्सी चालकों के चेहरों पर खुशी है, क्योंकि भारी भीड़ के कारण उनका व्यवसाय भी गति पकड़ रहा है।
- गोंडोला राइड की धूम: जोशीमठ से औली के बीच चलने वाली एशिया की सबसे लंबी ‘रोपवे’ (Gondola) की सवारी के लिए पर्यटकों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
प्रशासनिक मुस्तैदी और भविष्य की राह
सरकार और पर्यटन विभाग इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं:
- इंटरनेशनल वेन्यू की तैयारी: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व में घोषणा की थी कि औली को वैश्विक स्तर के स्कीइंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि यहाँ भविष्य में विंटर ओलंपिक जैसे बड़े आयोजन हो सकें।
- बुनियादी ढांचे का विकास: ढलानों पर कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनों (Snow-making machines) और बेहतर फिनिशिंग पॉइंट के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।





