नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय कपड़ा निर्यातकों को एक बड़ी राहत का संकेत देते हुए महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार अमेरिका के साथ व्यापारिक बातचीत में इस बात पर जोर दे रही है कि भारतीय टेक्सटाइल (कपड़ा) उत्पादों को भी ‘जीरो टैरिफ’ (शून्य आयात शुल्क) की सुविधा मिले, जो वर्तमान में बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों को उपलब्ध है। इस कदम से वैश्विक बाजार में भारतीय कपड़ों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है।
प्रतिस्पर्धा में बराबरी का लक्ष्य: बांग्लादेश को मिलता है ‘LDC’ का लाभ
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि भारतीय कपड़ा उद्योग को वैश्विक बाजार में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:
- शुल्क का अंतर: वर्तमान में बांग्लादेश को ‘कम विकसित देश’ (LDC) होने के नाते अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में शून्य शुल्क पर निर्यात की सुविधा मिलती है, जबकि भारतीय कपड़ों पर 9% से 11% तक का आयात शुल्क लगता है।
- समान अवसर (Level Playing Field): मंत्री ने कहा कि भारत अब गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के मामले में किसी से पीछे नहीं है। यदि अमेरिका भारतीय कपड़ों पर टैरिफ हटाता है, तो भारत अपनी दक्षता के दम पर बांग्लादेश और वियतनाम को पीछे छोड़ सकता है।
अमेरिका के साथ ‘ट्रेड डील’ का हिस्सा
यह बयान भारत और अमेरिका के बीच चल रही उच्च स्तरीय व्यापारिक चर्चाओं के बीच आया है:
- द्विपक्षीय वार्ता: पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि हालिया ‘ट्रेड फैक्टशीट’ और भविष्य के समझौतों में कपड़ा क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है।
- सप्लाई चेन में बदलाव: अमेरिका अब अपनी कपड़ा आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है, और भारत इस खाली जगह को भरने के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प बनकर उभरा है।
- रोजगार के अवसर: यदि अमेरिका में जीरो टैरिफ लागू होता है, तो भारत में टेक्सटाइल सेक्टर में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे, विशेषकर ग्रामीण इलाकों और महिला श्रमिकों के लिए।
कपड़ा उद्योग की प्रतिक्रिया और भविष्य की राह
उद्योग जगत ने इस बयान का गर्मजोशी से स्वागत किया है:
- निर्यात लक्ष्य: सरकार ने साल 2030 तक टेक्सटाइल निर्यात को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें यह टैरिफ छूट मील का पत्थर साबित होगी।
गुणवत्ता पर जोर: पीयूष गोयल ने निर्यातकों से अपनी गुणवत्ता और अनुपालन (Compliance) मानकों को वैश्विक स्तर पर बनाए रखने की अपील की है ताकि ‘ब्रांड इंडिया’ की साख मजबूत हो सके।





