नई दिल्ली। उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित चारधाम रेल परियोजना को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में विस्तृत जानकारी दी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और चारधाम के शेष धामों तक रेल कनेक्टिविटी विस्तार के लिए सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है।
रेल मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में कुल 216 किलोमीटर लंबाई की तीन नई रेल लाइनों को स्वीकृति दी गई है, जिनकी अनुमानित लागत 40,384 करोड़ रुपये है। अब तक परियोजना पर लगभग 19,898 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना चारधाम कनेक्टिविटी की आधारशिला है।
यह रेल लाइन देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरेगी। परियोजना के पूरा होने पर देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को ऋषिकेश और दिल्ली से सीधा रेल संपर्क मिलेगा।
रेल मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित रेल मार्ग हिमालय के अत्यधिक भूकंपीय सक्रिय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जिससे परियोजना में तकनीकी चुनौतियां बढ़ गई हैं। इसके चलते निर्माण कार्य में विशेष तकनीकी सावधानियां बरती जा रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, चारधाम रेल परियोजना से राज्य में पर्यटन, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, परियोजना की लागत, पर्यावरणीय प्रभाव और तकनीकी जोखिम को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सरकार का दावा है कि परियोजना के पूरा होने से चारधाम यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक होगी। लेकिन परियोजना की समयसीमा और लागत को लेकर अभी भी स्पष्टता का अभाव है।





