Thursday, February 12, 2026

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धौलास भूमि विवाद: मुख्यमंत्री धामी का सख्त रुख, जांच के आदेश, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

देहरादून। उत्तराखंड के धौलास क्षेत्र में विवादित भूमि आवंटन को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीर बताते हुए स्पष्ट किया है कि नियमों के खिलाफ हुए किसी भी प्रकार के भूमि आवंटन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण और साजिश की राजनीति स्वीकार्य नहीं है और सरकार पूरे मामले की गहन जांच कराएगी।

मुख्यमंत्री ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि धौलास भूमि आवंटन प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि भूमि आवंटन नियमों के विरुद्ध हुआ है, तो उक्त भूमि को राज्य सरकार में निहित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने हमेशा तुष्टीकरण की राजनीति को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि बार-बार जनसांख्यिकी बदलाव और मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे मुद्दों का सामने आना किसी बड़ी साजिश की ओर संकेत करता है। धौलास में कांग्रेस शासनकाल में हुआ भूमि आवंटन इसी प्रवृत्ति का उदाहरण है।

भाजपा ने भी कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। धर्मपुर क्षेत्र से विधायक एवं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि वर्ष 2004 में जिस संस्था को जमीन दी गई, वह विवादित रही है और उसकी गतिविधियों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि शीर्ष सैन्य संस्थान के समीप भूमि आवंटन से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े होते हैं।

चमोली ने कांग्रेस से पूछा कि यदि सरकार देवभूमि की जनसांख्यिकी और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कानून बनाती है, तो कांग्रेस विरोध क्यों करती है। उन्होंने यूसीसी, मतांतरण कानून, दंगारोधी कानून और धार्मिक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया।

भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि धौलास में विवादित जमीन खरीदने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है और सरकार उनके हितों की रक्षा करेगी। दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक बताया है।

धौलास भूमि विवाद अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तराखंड की राजनीति में बड़े मुद्दे के रूप में उभर रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से इस मामले की दिशा तय होने की संभावना है।

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