देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले महाकुंभ की भव्यता और सुरक्षा को लेकर अभी से कमर कस ली है। सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य इस महाकुंभ को अब तक का सबसे सुरक्षित और दिव्य आयोजन बनाना है। मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए हरिद्वार के सभी छोटे-बड़े पुलों का तत्काल ‘स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट’ कराया जाए। इसके साथ ही उन्होंने गंगा घाटों के सौंदर्यीकरण और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना (Master Plan) तैयार करने को कहा है।
सुरक्षा पर जोर: पुलों और ढांचों की होगी गहन जांच
मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग (PWD) और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि सुरक्षा के मानकों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा:
- सेफ्टी ऑडिट: हरिद्वार और कुंभ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी पुराने और नए पुलों की मजबूती की जांच तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा की जाएगी। जर्जर हो चुके पुलों की मरम्मत या उनके पुनर्निर्माण का कार्य समय सीमा के भीतर शुरू किया जाएगा।
- भीड़ नियंत्रण (Crowd Management): पुलों की क्षमता के अनुसार ही उन पर आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक और मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।
घाटों का सौंदर्यीकरण और सुविधाओं का विस्तार
कुंभ की दिव्यता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने हरिद्वार के घाटों और शहर के बुनियादी ढांचे को लेकर कई घोषणाएं कीं:
- घाटों का पुनरुद्धार: हर की पैड़ी समेत विभिन्न गंगा घाटों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, सफाई और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
- कनेक्टिविटी: कुंभ क्षेत्र की ओर आने वाली सड़कों को चौड़ा किया जाएगा और बाईपास मार्गों का निर्माण किया जाएगा ताकि मेले के दौरान ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा न हो।
- स्वच्छ कुंभ-निर्मल कुंभ: गंगा की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हुए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी दशा में गंदा पानी या सीवेज गंगा जी में न गिरे।
कुंभ क्षेत्र का होगा विस्तार
बैठक में मुख्यमंत्री ने कुंभ क्षेत्र के भौगोलिक विस्तार और सुविधाओं के विकेंद्रीकरण पर भी चर्चा की:
- उन्होंने निर्देश दिए कि कुंभ की तैयारियों को केवल हरिद्वार शहर तक सीमित न रखकर ऋषिकेश और अन्य समीपवर्ती क्षेत्रों तक विस्तारित किया जाए।
- मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभिन्न अखाड़ों और संतों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखें ताकि उनकी आवश्यकताओं के अनुसार व्यवस्थाएं की जा सकें।




