बेरूत: लेबनान में आर्थिक संकट और बुनियादी ढांचे की बदहाली के बीच एक और दर्दनाक हादसा सामने आया है। लेबनान के एक रिहायशी इलाके में एक जर्जर बहुमंजिला इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई, जिसमें दबने से अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका है, जिन्हें निकालने के लिए राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। गौरतलब है कि लेबनान में पिछले एक हफ्ते के भीतर इमारत गिरने की यह दूसरी बड़ी घटना है, जिसने देश के जर्जर हो चुके निर्माणों और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसे का मंजर: चीख-पुकार के बीच शुरू हुआ बचाव कार्य
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब लोग घरों के भीतर सो रहे थे:
- अचानक धराशायी हुई इमारत: प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि इमारत गिरने से पहले एक जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और देखते ही देखते पूरी संरचना मलबे के ढेर में तब्दील हो गई।
- बचाव अभियान: नागरिक सुरक्षा दल (Civil Defense) और रेड क्रॉस की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं। मलबे के नीचे फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए भारी मशीनों और कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- घायलों की स्थिति: अब तक मलबे से कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें से कुछ की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। उन्हें पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
एक हफ्ते में दूसरा हादसा: आखिर क्यों गिर रही हैं इमारतें?
लेबनान में बार-बार हो रहे इन हादसों के पीछे विशेषज्ञों ने कई चिंताजनक कारण बताए हैं:
- आर्थिक बदहाली: देश के भीषण आर्थिक संकट के कारण पुरानी इमारतों का रखरखाव (Maintenance) लंबे समय से नहीं हो पाया है।
- भ्रष्टाचार और अवैध निर्माण: कई इलाकों में बिना किसी तकनीकी जांच के पुरानी इमारतों के ऊपर अतिरिक्त मंजिलें बना दी गई हैं, जिससे उनकी नींव कमजोर हो गई है।
- बेरूत धमाके का असर: विशेषज्ञों का मानना है कि 2020 में हुए भीषण बंदरगाह धमाके के कारण शहर की कई इमारतों की संरचनात्मक मजबूती (Structural Integrity) को गहरा नुकसान पहुंचा था, जो अब धीरे-धीरे ढह रही हैं।
प्रशासन के खिलाफ जनता में आक्रोश
लगातार हो रहे हादसों के बाद स्थानीय निवासियों में सरकार और नगर निकायों के प्रति भारी नाराजगी है:
- सुरक्षा ऑडिट की मांग: लोगों का आरोप है कि प्रशासन को कई बार इन जर्जर इमारतों की शिकायत की गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- बेघर होने का डर: कई परिवारों को अब अपनी इमारतों में रहने से डर लग रहा है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनके पास कहीं और जाने का विकल्प नहीं है।




