Monday, February 9, 2026

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इसरो का अगला महामिशन: चंद्रयान-4 के लिए लैंडिंग साइट फाइनल; चंद्रमा के इस ऊंचे पहाड़ पर उतरेगा रोवर, धरती पर वापस लाएगा चांद की मिट्टी

बेंगलुरु: चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब अपने अगले बड़े मिशन ‘चंद्रयान-4’ की तैयारियों में जुट गया है। इसरो के वैज्ञानिकों ने इस जटिल मिशन के लिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास एक विशेष लैंडिंग साइट का चयन कर लिया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रयान-4 चंद्रमा के एक विशाल पहाड़ के पास उतरेगा, जिसे ‘मोंस म्यूटोन’ (Mons Mouton) के नाम से जाना जाता है। यह मिशन भारत के लिए बेहद क्रांतिकारी होने वाला है, क्योंकि पहली बार कोई भारतीय अंतरिक्ष यान न केवल चंद्रमा पर उतरेगा, बल्कि वहां से मिट्टी और चट्टानों के नमूने (Samples) एकत्र कर वापस धरती पर भी लौटेगा।

क्यों चुना गया ‘मोंस म्यूटोन’ पहाड़?

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित यह पहाड़ कई मायनों में वैज्ञानिक खोज के लिए महत्वपूर्ण है:

  • पानी की खोज: मोंस म्यूटोन के आसपास के क्षेत्रों में ‘वॉटर आइस’ (बर्फ के रूप में पानी) होने की प्रबल संभावना जताई गई है।
  • सूरज की रोशनी: इस पहाड़ की चोटी पर काफी लंबे समय तक सूरज की रोशनी रहती है, जो लैंडर और रोवर के सौर पैनलों (Solar Panels) को ऊर्जा देने के लिए जरूरी है।
  • अंधेरे गड्ढे: इस पहाड़ के पास ही कई ऐसे गहरे गड्ढे (Craters) हैं जो हमेशा अंधेरे में रहते हैं, जहाँ करोड़ों सालों से जमा खनिज और गैसों के अवशेष मिल सकते हैं।

चंद्रयान-4 का मिशन: कैसे वापस आएंगे मिट्टी के सैंपल?

चंद्रयान-4 मिशन पिछले मिशनों की तुलना में कहीं अधिक जटिल और बहु-चरणीय (Multi-stage) होगा:

  1. सैंपल कलेक्शन: रोवर चंद्रमा की सतह की खुदाई करेगा और वहां से मिट्टी और पत्थरों के नमूने इकट्ठा करके एक सुरक्षित कंटेनर में रखेगा।
  2. मून टेक-ऑफ: सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा चंद्रमा की सतह से वापस उड़ान भरना होगा। यान का एक हिस्सा (Ascent Module) चंद्रमा से ऊपर उठेगा और कक्षा में मौजूद दूसरे हिस्से से जुड़ेगा।
  3. धरती की ओर वापसी: अंतरिक्ष में डॉकिंग की प्रक्रिया पूरी करने के बाद, यान का ‘रिटर्न मॉड्यूल’ चंद्रमा की कक्षा को छोड़कर पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और सुरक्षित रूप से समुद्र या जमीन पर लैंड करेगा।

मिशन की सफलता से भारत रचेगा इतिहास

अगर इसरो इस मिशन को सफलतापूर्वक पूरा कर लेता है, तो भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन जाएगा जिसने चंद्रमा से ‘सैंपल रिटर्न’ करने की तकनीक हासिल की है। अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही ऐसा करने में सफल रहे हैं। यह मिशन भविष्य के मानव मिशनों (Gaganyaan Moon Mission) के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा, क्योंकि इससे चंद्रमा से वापस आने वाली तकनीक का परीक्षण हो सकेगा।

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