Monday, February 9, 2026

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भारतीय सेना का शौर्य अब गिनीज बुक में: माउंट एवरेस्ट फतह का बना विश्व रिकॉर्ड; लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी के नेतृत्व ने रचा इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने एक बार फिर दुनिया के सबसे ऊंचे शिखर ‘माउंट एवरेस्ट’ पर अपनी सफलता का परचम लहराकर वैश्विक स्तर पर गौरव हासिल किया है। भारतीय सेना के एक विशेष पर्वतारोहण अभियान को आधिकारिक तौर पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स (Guinness World Records) में दर्ज किया गया है। इस साहसिक और चुनौतीपूर्ण अभियान का सफल नेतृत्व सेना के अनुभवी अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी ने किया था। यह सम्मान न केवल भारतीय सेना के साहस को दर्शाता है, बल्कि पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती तकनीकी और शारीरिक दक्षता का भी प्रतीक है।

क्यों बना यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड?

आमतौर पर एवरेस्ट फतह की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इस बार का रिकॉर्ड कुछ खास कारणों से बेहद विशिष्ट रहा:

  • सबसे बड़ी टीम का सफल आरोहण: यह रिकॉर्ड एक ही सैन्य अभियान के तहत सबसे अधिक संख्या में पर्वतारोहियों द्वारा एवरेस्ट की चोटी पर एक साथ पहुंचने और सफल वापसी के लिए दिया गया है।
  • अदम्य साहस और अनुशासन: कर्नल मनोज जोशी के नेतृत्व में टीम ने बिना किसी बड़े हादसे के, बेहद खराब मौसम और ‘डेथ जोन’ की चुनौतियों को मात देते हुए इस मिशन को पूरा किया।
  • तकनीकी सटीकता: टीम ने चढ़ाई के दौरान संचार और सुरक्षा के उन मानकों को स्थापित किया, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अद्वितीय माना गया।

लेफ्टिनेंट कर्नल मनोज जोशी का नेतृत्व और टीम का जज्बा

अभियान की सफलता में नेतृत्व की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है:

  1. कठिन प्रशिक्षण: कर्नल जोशी के मार्गदर्शन में टीम को कई महीनों तक लद्दाख और सियाचिन जैसे अत्यधिक ठंडे इलाकों में कठोर प्रशिक्षण दिया गया था।
  2. रणनीतिक कौशल: माउंट एवरेस्ट पर ऑक्सीजन की कमी और बर्फीले तूफानों के बीच टीम के मनोबल को बनाए रखने और सही समय पर ‘समिट पुश’ (चोटी की ओर बढ़ना) का निर्णय लेने में कर्नल जोशी का अनुभव निर्णायक साबित हुआ।
  3. टीम वर्क: इस दल में सेना के विभिन्न अंगों के जवान शामिल थे, जिन्होंने ‘सेवा परमो धर्म:’ के ध्येय वाक्य को चरितार्थ करते हुए एक-दूसरे का साथ निभाया।

देश और सेना के लिए गौरव का क्षण

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण पत्र मिलने के बाद सैन्य मुख्यालय में हर्ष का माहौल है:

  • सेना प्रमुख का संदेश: सेना प्रमुख ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह रिकॉर्ड आने वाली पीढ़ियों और युवा पर्वतारोहियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
  • वैश्विक पहचान: इस रिकॉर्ड के दर्ज होने से अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण समुदाय में भारतीय सेना की ट्रेनिंग और दक्षता की साख और अधिक बढ़ गई है।

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