न्यूयॉर्क/लंदन: दिवंगत अमेरिकी वित्तपोषक और सजायाफ्ता यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी गोपनीय फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद पूरी दुनिया के राजनीतिक और कॉरपोरेट गलियारों में सुनामी आ गई है। इन फाइलों में दर्ज नामों और साक्ष्यों के आधार पर अमेरिका, ब्रिटेन, नॉर्वे और फ्रांस जैसे शक्तिशाली देशों में कई दिग्गज हस्तियों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा है। मानव तस्करी और यौन शोषण के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें अब इतनी गहरी हो चुकी हैं कि विश्व के 80 से अधिक देशों की जांच एजेंसियों ने अपने स्तर पर आधिकारिक पड़ताल शुरू कर दी है।
वैश्विक इस्तीफे और गिरती साख: कहां-क्या हुआ?
एपस्टीन के साथ संबंधों और संदिग्ध मुलाकातों के आरोप लगने के बाद कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों पर गाज गिरी है:
- अमेरिका और ब्रिटेन: इन देशों में कई पूर्व सरकारी अधिकारियों, बैंकरों और प्रतिष्ठित दानदाताओं ने जांच के दायरे में आने के बाद अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है। शाही परिवार के साथ एपस्टीन के संबंधों ने ब्रिटेन में भी संवैधानिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर दी है।
- नॉर्वे और फ्रांस: नॉर्वे में कुछ शीर्ष दानदाताओं और राजनेताओं ने नैतिक आधार पर इस्तीफे दिए हैं, जबकि फ्रांस में पुलिस उन संपत्तियों और मॉडलों की जांच कर रही है जो एपस्टीन के पेरिस स्थित नेटवर्क से जुड़ी थीं।
- कॉरपोरेट जगत: दुनिया के कई बड़े बैंकों और टेक कंपनियों के बोर्ड सदस्यों को भी इन फाइलों में नाम आने के बाद इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
80 देशों में जांच का दायरा: एक अंतरराष्ट्रीय अपराध सिंडिकेट
इंटरपोल और विभिन्न देशों की संघीय एजेंसियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि एपस्टीन का यह जाल कितना विस्तृत था:
- मानव तस्करी का रूट: जांच का मुख्य केंद्र उन देशों पर है जहाँ से युवतियों और नाबालिगों को धोखे या तस्करी के जरिए एपस्टीन के निजी द्वीपों और आवासों तक लाया जाता था।
- मनी लॉन्ड्रिंग: 80 देशों की बैंक प्रणालियों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस सेक्स रैकेट को वित्तपोषित करने के लिए किन खातों और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।
- ब्लैकमेलिंग के आरोप: यह आशंका जताई जा रही है कि एपस्टीन इन फाइलों और वीडियो का इस्तेमाल दुनिया के शक्तिशाली नेताओं को ब्लैकमेल करने और वैश्विक नीतियों को प्रभावित करने के लिए करता था।
खुलासे की भयावहता: पीड़ितों की न्याय की गुहार
हाल ही में सार्वजनिक किए गए हजारों पन्नों के अदालती दस्तावेजों में न केवल नामों का जिक्र है, बल्कि पीड़ितों के बयान भी दर्ज हैं। इन बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल एक व्यक्ति का अपराध नहीं था, बल्कि इसमें कई देशों की सत्ताधारी हस्तियों का संरक्षण प्राप्त था। पीड़ितों के वकीलों का कहना है कि यह तो अभी केवल शुरुआत है, अभी कई और चौंकाने वाले नाम सामने आना बाकी हैं।





