नई दिल्ली: भारत में डिजिटल टोल संग्रह की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। ‘वन नेशन-वन टैग’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए FASTag वार्षिक पास (Annual Pass) उपयोगकर्ताओं की संख्या ने 50 लाख का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज 6 महीनों के भीतर FASTag के जरिए 26 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए हैं। यह उछाल न केवल टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों से मुक्ति का संकेत है, बल्कि भारतीय परिवहन क्षेत्र में डिजिटल भुगतान के प्रति लोगों के बढ़ते भरोसे को भी दर्शाता है।
वार्षिक पास की बढ़ती लोकप्रियता के मुख्य कारण
टोल भुगतान के इस तरीके को अपनाने वाले यूजर्स की संख्या में वृद्धि के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं:
- किफायती और बचत: वार्षिक पास सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है जो नियमित रूप से एक ही टोल प्लाजा से गुजरते हैं। यह पास स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों को भारी छूट प्रदान करता है।
- समय की बचत: पास धारकों को बार-बार रिचार्ज करने या कतार में खड़े होने की जरूरत नहीं होती, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाता है।
- डिजिटल पारदर्शिता: प्रत्येक लेनदेन का रिकॉर्ड एसएमएस और ईमेल के जरिए उपलब्ध होने से टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ी है।
आंकड़ों में डिजिटल क्रांति: 6 महीने का सफर
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और NPCI के सहयोग से जुटाए गए आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं:
- लेनदेन में उछाल: पिछले 6 महीनों में 26 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन यह बताते हैं कि अब देश के अधिकांश वाहन चालक नकदी के बजाय डिजिटल भुगतान को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
- राजस्व में वृद्धि: सुव्यवस्थित टोल संग्रह प्रणाली के कारण सरकार के टोल राजस्व में भी महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है, जिसका उपयोग सड़क बुनियादी ढांचे के विस्तार में किया जा रहा है।
- स्थानीय निवासियों को लाभ: 50 लाख पास यूजर्स में से एक बड़ा हिस्सा उन स्थानीय लोगों का है, जो टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं और रियायती पास का लाभ उठा रहे हैं।
तकनीकी सुधार और भविष्य की योजनाएं
सरकार FASTag प्रणाली को और अधिक सुलभ और त्रुटिहीन बनाने पर काम कर रही है:
- ऑटो-रिफिल सुविधा: कई बैंकों ने अब ‘ऑटो-रिफिल’ का विकल्प दिया है, जिससे बैलेंस कम होने पर खाता अपने आप रिचार्ज हो जाता है।
- जीपीएस आधारित टोल संग्रह: सरकार आने वाले समय में जीपीएस (GPS) आधारित टोल सिस्टम पर भी विचार कर रही है, लेकिन वर्तमान में FASTag की सफलता ने इसके लिए एक मजबूत आधार तैयार कर दिया है।





