देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में राज्य कर (जीएसटी) विभाग ने कर चोरी करने वालों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (SUI) ने शहर की 7 प्रमुख फर्मों पर एक साथ छापेमारी करते हुए लगभग ₹4.75 करोड़ की टैक्स चोरी का पर्दाफाश किया है। इन फर्मों पर आरोप है कि ये फर्जी खरीद-फरोख्त दिखाकर और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ उठाकर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचा रही थीं। विभाग की इस औचक कार्रवाई से व्यापारिक जगत में हड़कंप मच गया है।
छापेमारी की कार्रवाई: 10 टीमों ने एक साथ बोला धावा
राज्य कर आयुक्त के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा गया था:
- संयुक्त अभियान: जीएसटी विभाग की करीब 10 अलग-अलग टीमों ने देहरादून के विभिन्न व्यापारिक केंद्रों और औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित इन 7 फर्मों के दफ्तरों और गोदामों पर एक साथ दस्तक दी।
- दस्तावेजों की जब्ती: जांच के दौरान टीमों ने बड़ी संख्या में कच्चे बिल, संदिग्ध लेनदेन के दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड (लैपटॉप व हार्ड ड्राइव) को अपने कब्जे में लिया है।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल: शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन फर्मों ने करोड़ों रुपये के ऐसे बिल दिखाए थे, जिनका वास्तविक माल की आपूर्ति से कोई संबंध नहीं था।
कर चोरी का तरीका: कैसे होता था फर्जीवाड़ा?
विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन फर्मों ने टैक्स बचाने के लिए सुनियोजित तरीके अपनाए थे:
- बोगस बिलिंग: बिना माल भेजे केवल कागजों पर खरीद-बिक्री दिखाकर जीएसटी पोर्टल पर डेटा दर्ज किया गया।
- गलत ITC दावा: फर्जी बिलों के आधार पर सरकार से इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस मांगा गया, जो नियमानुसार केवल वास्तविक खरीद पर ही मिलता है।
- कम बिक्री दिखाना: कई फर्मों ने अपने वास्तविक टर्नओवर को काफी कम करके दिखाया था, ताकि वे टैक्स के दायरे से बाहर रह सकें या कम टैक्स भरें।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
राज्य कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी केवल शुरुआत है। विभाग अब इन 7 फर्मों के बैंक खातों और पिछले तीन वर्षों के रिटर्न की बारीकी से जांच कर रहा है।
- जुर्माना और वसूली: विभाग ने संबंधित फर्मों को नोटिस जारी कर दिया है और चोरी किए गए ₹4.75 करोड़ के साथ-साथ भारी जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
- आगे की कार्रवाई: यदि जांच में किसी बड़ी साजिश का पता चलता है, तो संबंधित फर्म स्वामियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर गिरफ्तारी भी की जा सकती है।
जीएसटी विभाग ने साफ किया है कि उनका उद्देश्य केवल उन लोगों पर नकेल कसना है जो जानबूझकर टैक्स चोरी कर रहे हैं। इस कार्रवाई से ईमानदार करदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की गई है ताकि बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे।
“हमारी टीमें डेटा एनालिटिक्स के जरिए संदिग्ध फर्मों पर नजर रख रही थीं। ₹4.75 करोड़ की चोरी शुरुआती आंकड़ा है, जांच पूरी होने तक यह राशि बढ़ सकती है। कर चोरी के खिलाफ हमारा अभियान निरंतर जारी रहेगा।” — अपर आयुक्त, राज्य कर उत्तराखंड





