Friday, February 6, 2026

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चारधाम यात्रा 2026: तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार; बुनियादी ढांचे के लिए सात जिलों से शासन को भेजे गए 44 करोड़ के प्रस्ताव

देहरादून: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। यात्रा मार्ग पर सुविधाओं के विस्तार और मरम्मत कार्यों के लिए प्रदेश के सात संबंधित जिलों ने कुल 44 करोड़ रुपये के बजट प्रस्ताव शासन को भेज दिए हैं। इन प्रस्तावों में सड़क सुधार, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता और यात्रियों के ठहरने के इंतजामों को प्राथमिकता दी गई है। शासन स्तर पर इन प्रस्तावों की समीक्षा शुरू हो गई है, ताकि यात्रा शुरू होने से पहले सभी निर्माण कार्य समय पर पूरे किए जा सकें।

किन जिलों ने भेजे प्रस्ताव?

चारधाम यात्रा मार्ग और मुख्य पड़ावों से जुड़े सात जिलों के जिलाधिकारियों ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार बजट की मांग की है:

  • रुद्रप्रयाग (केदारनाथ धाम): केदारघाटी में सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों के लिए सबसे बड़ा हिस्सा प्रस्तावित है।
  • चमोली (बदरीनाथ धाम): मास्टर प्लान के कार्यों के साथ-साथ यात्री सुविधाओं के लिए विशेष बजट की मांग की गई है।
  • उत्तरकाशी (गंगोत्री और यमुनोत्री): धामों तक जाने वाले पैदल रास्तों और पड़ावों के सुधार के लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं।
  • पौड़ी, टिहरी, हरिद्वार और देहरादून: इन प्रवेश द्वारों और ट्रांजिट कैंपों की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए योजनाएं तैयार की गई हैं।

44 करोड़ के बजट का कहां होगा उपयोग?

शासन को भेजे गए इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों पर जोर दिया गया है:

  1. सड़क और फुटपाथ सुधार: भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा दीवार और तीर्थयात्रियों के चलने के लिए पैदल रास्तों की मरम्मत।
  2. पेयजल एवं स्वच्छता: यात्रा मार्ग पर प्याऊ (वॉटर स्टेशन), बायो-टॉयलेट्स और कूड़ा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना।
  3. स्ट्रीट लाइट और सूचना केंद्र: रात के समय यात्रियों की सुरक्षा के लिए सोलर लाइटें लगाना और जगह-जगह हेल्प डेस्क स्थापित करना।
  4. पार्किंग व्यवस्था: प्रमुख पड़ावों पर वाहनों के दबाव को कम करने के लिए नई पार्किंग साइटों का विकास।

शासन की प्राथमिकता: समयबद्धता और गुणवत्ता

मुख्य सचिव और पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि बजट स्वीकृत होते ही कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किए जाएं। सरकार का लक्ष्य है कि यात्रा के आधिकारिक आगाज से कम से कम 15 दिन पहले सभी बुनियादी काम पूरे हो जाएं। इस बार यात्रा के दौरान ‘स्मार्ट पंजीकरण’ और क्यू-मैनेजमेंट (Queue Management) पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि धामों में भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

बीते वर्षों के अनुभवों से लिया सबक

पिछले वर्ष यात्रा के दौरान उमड़ी रिकॉर्ड भीड़ को देखते हुए प्रशासन इस बार अधिक सतर्क है। 44 करोड़ के इन प्रस्तावों में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और ऑक्सीजन बूथों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। विशेष रूप से केदारनाथ और यमुनोत्री के कठिन पैदल मार्गों पर स्वास्थ्य चौकियों को और अधिक आधुनिक बनाने की योजना है।

“चारधाम यात्रा हमारी प्राथमिकता है। सात जिलों से प्राप्त 44 करोड़ के प्रस्तावों पर शासन गंभीरता से विचार कर रहा है। हमारा प्रयास है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को इस बार पहले से बेहतर और सुरक्षित अनुभव मिले।” — पर्यटन सचिव, उत्तराखंड शासन

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