नई दिल्ली: भारत अपनी वैश्विक व्यापारिक पहुंच को विस्तार देते हुए एक और ऐतिहासिक कदम उठाने की दहलीज पर खड़ा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ सफल समझौते के बाद, अब भारत सरकार खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सभी छह सदस्य देशों के साथ एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। वाणिज्य मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब, ओमान, कतर, कुवैत, बहरीन और यूएई के साथ इस ‘ब्लॉक-टू-ब्लॉक’ डील को लेकर बातचीत निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। इस समझौते से न केवल द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी, बल्कि भारतीय निर्यातकों के लिए खाड़ी के बाजारों में ड्यूटी-फ्री (शुल्क मुक्त) पहुंच का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
किन 6 देशों के साथ हो रही है डील?
खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में शामिल ये देश भारत के रणनीतिक और आर्थिक साझेदार हैं:
- सऊदी अरब: भारत का प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता और बड़ा निवेश भागीदार।
- ओमान: सामरिक रूप से महत्वपूर्ण, जिसके साथ द्विपक्षीय वार्ता पहले ही काफी आगे बढ़ चुकी है।
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE): पहले से मौजूद CEPA समझौते को अब पूरे खाड़ी समूह के साथ एकीकृत किया जा सकता है।
- कतर, कुवैत और बहरीन: ये देश भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य निर्यात के बड़े केंद्र हैं।
फ्री ट्रेड पैक्ट से भारत को क्या होगा लाभ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा:
- निर्यात में भारी उछाल: रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां), चावल और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों को इस समझौते से सबसे अधिक लाभ होगा क्योंकि इन पर लगने वाले आयात शुल्क में भारी कमी आएगी।
- ऊर्जा सुरक्षा और निवेश: बदले में भारत को खाड़ी देशों से तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति के साथ-साथ बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में बड़े निवेश की उम्मीद है।
- रोजगार के अवसर: भारतीय कामगारों और पेशेवरों के लिए खाड़ी देशों में काम करने की प्रक्रिया अधिक सुगम और व्यवस्थित होने की संभावना है।
चीन को चुनौती और ग्लोबल सप्लाई चेन
इस समझौते को चीन के बढ़ते प्रभाव के काट के रूप में भी देखा जा रहा है। भारत मध्य-पूर्व (Middle East) के साथ अपने आर्थिक संबंधों को इतना मजबूत करना चाहता है कि वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक अपरिहार्य हिस्सा बन जाए। ‘इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) के नजरिए से भी यह एफटीए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष: वार्ता का अंतिम चरण
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्ष अपनी-अपनी ‘सेंसिटिव लिस्ट’ (संवेदनशील वस्तुओं की सूची) पर चर्चा कर रहे हैं ताकि घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा की जा सके। उम्मीद जताई जा रही है कि चालू वर्ष के अंत तक इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।
“खाड़ी देश भारत के लिए केवल व्यापारिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि वे हमारी ऊर्जा और रणनीतिक सुरक्षा का हिस्सा हैं। यह फ्री ट्रेड पैक्ट हमारे संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा और दोनों क्षेत्रों की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा।” — वरिष्ठ सरकारी अधिकारी




