बागेश्वर: देवभूमि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भूगर्भीय हलचल का सिलसिला जारी है। आज सुबह जनपद बागेश्वर और आसपास के इलाकों में भूकंप के मध्यम झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय निवासियों में अफरा-तफरी मच गई। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 3.4 मापी गई है। हालांकि, तीव्रता कम होने के कारण अभी तक कहीं से भी किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान या संपत्तियों को क्षति पहुँचने की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन बार-बार आ रहे इन झटकों ने हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है।
भूकंप का समय और केंद्र
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, भूकंप की स्थिति इस प्रकार रही:
- समय: भूकंप के झटके सुबह महसूस किए गए, जब लोग अपने दैनिक कार्यों में जुटे थे।
- केंद्र (Epicenter): भूकंप का केंद्र बागेश्वर जिले के भीतर जमीन की सतह से लगभग 5 से 10 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
- प्रभाव: झटके महसूस होते ही कई लोग डर के मारे अपने घरों और दुकानों से बाहर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
प्रशासनिक सतर्कता और आपदा प्रबंधन
भूकंप की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड पर आ गया है:
- तहसीलों से फीडबैक: जिला मजिस्ट्रेट ने सभी तहसीलदारों और पटवारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों पर नजर: दूरस्थ पहाड़ी गांवों में पुराने मकानों की स्थिति की जांच की जा रही है ताकि किसी भी दरार या संभावित खतरे का पता लगाया जा सके।
- हेल्पलाइन सक्रिय: आपदा कंट्रोल रूम को 24 घंटे सक्रिय रहने को कहा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन सूचना पर त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके।
हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता
भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि उत्तराखंड का अधिकांश हिस्सा सिस्मिक जोन 4 और 5 में आता है, जो भूकंप की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील है। बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली जैसे जिलों में टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण छोटे और मध्यम तीव्रता के भूकंप आना एक सामान्य लेकिन चेतावनी भरी प्रक्रिया है। विशेषज्ञों ने स्थानीय निवासियों को भूकंप के प्रति जागरूक रहने और मकान बनाते समय भूकंप-रोधी तकनीक का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
स्थानीय लोगों का अनुभव
स्थानीय निवासियों के अनुसार, झटके कुछ सेकंड तक महसूस किए गए। “हम घर के अंदर थे कि अचानक खिड़कियां और बर्तन बजने लगे। हमें तुरंत एहसास हो गया कि यह भूकंप है और हम बच्चों के साथ खुले मैदान की ओर भागे,” बागेश्वर निवासी एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया।
“भूकंप की तीव्रता कम थी, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। फिर भी, हमने अपनी टीमों को सतर्क कर दिया है। अभी तक सभी क्षेत्रों से स्थिति सामान्य होने की रिपोर्ट मिली है।” — जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी





