बीजिंग/वॉशिंगटन: वैश्विक सैन्य शक्ति के समीकरणों को चुनौती देते हुए चीन ने एक ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है, जो किसी हॉलीवुड फिल्म की कल्पना जैसा प्रतीत होता है। चीन ने अपने भविष्यगामी ‘एरोस्पेस कॉम्बैट सिस्टम’ के तहत ‘लुआननियाओ’ (Luanniao) नामक एक विशालकाय उड़ने वाले युद्धपोत (Airborne Aircraft Carrier) का कॉन्सेप्ट पेश किया है। दावा किया जा रहा है कि यह आसमानी युद्धपोत अमेरिका के सबसे शक्तिशाली नौसैनिक युद्धपोत ‘जेराल्ड आर. फोर्ड’ से भी 20% अधिक विशाल होगा। यदि यह प्रोजेक्ट हकीकत में बदलता है, तो यह पारंपरिक युद्ध कला को पूरी तरह से बदलकर रख देगा।
‘लुआननियाओ’ की विशेषताएं: आसमान का महाबली
चीन द्वारा साझा किए गए डिजाइन और तकनीकी विवरण के अनुसार, यह एयरक्राफ्ट कैरियर असाधारण क्षमताओं से लैस होगा:
- विशाल आकार: इसकी लंबाई करीब 242 मीटर और विंगस्पैन (पंखों का फैलाव) लगभग 470 मीटर होने का अनुमान है, जो इसे अब तक का सबसे बड़ा मानव निर्मित उड़ने वाला ढांचा बना देगा।
- अत्याधुनिक हथियार प्रणाली: यह केवल एक परिवहन विमान नहीं होगा, बल्कि इसमें ‘हाई-एनर्जी लेजर वेपन्स’ और ‘रेल गन’ जैसे विध्वंसक हथियार तैनात होंगे, जो दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही भस्म कर सकेंगे।
- ड्रोन और लड़ाकू विमानों का अड्डा: लुआननियाओ अपने साथ दर्जनों स्वदेशी लड़ाकू विमानों और सैकड़ों आत्मघाती ड्रोनों की खेप लेकर उड़ने में सक्षम होगा, जिन्हें आसमान से ही लॉन्च किया जा सकेगा।
अमेरिका की चिंता: सुपरपावर की रेस में चीन का बड़ा दांव
चीन का यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के दबदबे को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है:
- परमाणु ऊर्जा से संचालित: माना जा रहा है कि इतने विशाल ढांचे को हवा में रखने के लिए चीन इसमें ‘स्मॉल न्यूक्लियर रिएक्टर’ (SMR) तकनीक का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे यह महीनों तक बिना लैंडिंग किए हवा में रह सकेगा।
- रणनीतिक बढ़त: समुद्र के रास्ते जाने वाले युद्धपोतों को हफ्तों का समय लगता है, लेकिन ‘लुआननियाओ’ जैसे आसमानी कैरियर चंद घंटों में दुनिया के किसी भी कोने में अपनी वायुसेना तैनात कर सकते हैं।
- साइंस फिक्शन या हकीकत?: हालांकि कई विशेषज्ञ इसे चीन का ‘प्रोपेगेंडा’ या मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा मान रहे हैं, लेकिन चीन की हालिया अंतरिक्ष और हाइपरसोनिक मिसाइल प्रगति को देखते हुए पेंटागन इसे गंभीरता से ले रहा है।
चीन का ‘नैनचांग’ प्रोजेक्ट और भविष्य का रोडमैप
यह प्रोजेक्ट चीन के ‘मिन्गुओ’ (Nanchang Project) का हिस्सा है, जिसके तहत वह ऐसे हथियार विकसित कर रहा है जो अंतरिक्ष की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) तक पहुंच सकें। चीनी मीडिया के अनुसार, ‘लुआननियाओ’ को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह रडार की पकड़ में न आए और एक साथ कई मोर्चों पर हमला करने में सक्षम हो।
विशेषज्ञों का विश्लेषण: तकनीकी चुनौतियां
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े ढांचे को गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ हवा में टिकाए रखना एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है। इसके लिए चीन को ‘एंटी-ग्रेविटी’ या अत्यधिक शक्तिशाली ‘आयन प्रोपल्शन’ (Ion Propulsion) इंजन विकसित करने होंगे, जिस पर वर्तमान में शोध जारी है।
“चीन अब केवल समुद्र और जमीन तक सीमित नहीं रहना चाहता। ‘लुआननियाओ’ का कॉन्सेप्ट यह दर्शाता है कि बीजिंग भविष्य में ‘एरोस्पेस डोमिनेंस’ यानी अंतरिक्ष और वायुमंडल के मिलन बिंदु पर अपना कब्जा जमाना चाहता है।” — एक अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषक





