Wednesday, February 4, 2026

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राहुल गांधी के ‘सरदार’ वाले बयान पर सियासी बवाल: केंद्रीय मंत्री को लेकर की गई टिप्पणी पर भाजपा हमलावर; कहा— ‘कांग्रेस की सोच हमेशा से सिख विरोधी रही’

नई दिल्ली: संसद के भीतर और बाहर सत्तापक्ष एवं विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा एक केंद्रीय मंत्री को संबोधित करते हुए दी गई टिप्पणी ‘सरदार नहीं होते गद्दार’ ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बयान को सिखों का अपमान और विभाजनकारी राजनीति करार देते हुए राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राहुल गांधी अपनी टिप्पणियों के जरिए एक विशेष समुदाय की भावनाओं से खेल रहे हैं और समाज में वैमनस्य फैला रहे हैं।

विवाद की शुरुआत: क्या कहा राहुल गांधी ने?

एक जनसभा और बाद में सोशल मीडिया चर्चाओं के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के एक सिख मंत्री का जिक्र करते हुए यह विवादित टिप्पणी की।

  • बयान का संदर्भ: राहुल गांधी सरकार की नीतियों और कुछ नेताओं की निष्ठा पर सवाल उठा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने तुकबंदी करते हुए कहा, “सरदार नहीं होते गद्दार”, जिसे सीधे तौर पर कैबिनेट के एक वरिष्ठ सिख मंत्री से जोड़कर देखा गया।
  • विपक्ष का तर्क: कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि राहुल गांधी दरअसल सिखों की वीरता और ईमानदारी की तारीफ कर रहे थे, लेकिन भाजपा ने इसे तोड़-मरोड़कर पेश किया है।

भाजपा का पलटवार: “इतिहास गवाह है”

राहुल गांधी के बयान के चंद घंटों के भीतर ही भाजपा के दिग्गज नेताओं और सिख विंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी:

  1. सिखों का अपमान: केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि राहुल गांधी को किसी की ‘वफादारी’ प्रमाणित करने का कोई हक नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या राहुल गांधी यह संकेत दे रहे हैं कि जो सिख भाजपा में हैं, वे गद्दार हैं?
  2. 1984 के दंगों का जिक्र: भाजपा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाई। पार्टी ने कहा कि जिस दल के शासन में सिखों का कत्लेआम हुआ, वह आज सिखों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट न दे।
  3. सड़कों पर प्रदर्शन: दिल्ली और पंजाब के कई हिस्सों में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के पुतले फूंके और उनसे माफी की मांग की।

सिख संगठनों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस बयान पर विभिन्न सिख धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी अपनी राय रखी है। कुछ संगठनों का कहना है कि राजनीति में समुदाय के नाम का इस्तेमाल बंद होना चाहिए, वहीं कुछ ने राहुल गांधी के शब्दों के चयन को ‘अपरिपक्व’ बताया है।

संसद में गूंजने के आसार

माना जा रहा है कि इस मुद्दे को भाजपा संसद के आगामी सत्र में बड़े स्तर पर उठाएगी। संसदीय कार्य मंत्री ने संकेत दिए हैं कि वे इस मुद्दे पर राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी ला सकते हैं।

“राहुल गांधी की मानसिकता हमेशा से समुदायों को आपस में लड़ाने की रही है। ‘सरदार’ शब्द के साथ ‘गद्दार’ जैसे शब्द का प्रयोग करना उनकी कुंठित सोच को दर्शाता है। उन्हें पूरे देश और सिख समाज से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।” — भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता

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