देहरादून: उत्तराखंड निर्वाचन आयोग राज्य में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए प्री-एसआईआर (Pre-SIR) गतिविधियां चला रहा है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य वर्तमान मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट से करना है, ताकि फर्जीवाड़े और दोहरी प्रविष्टियों को खत्म किया जा सके।
क्या है मुख्य अपडेट और 19 लाख का आंकड़ा?
- मैपिंग से बाहर 19 लाख वोटर: राज्य में कुल 85 लाख मतदाताओं में से करीब 75.28% (लगभग 65 लाख) की मैपिंग पहले चरण में पूरी हो चुकी है। लेकिन, लगभग 19,79,164 मतदाता ऐसे हैं जिनकी मैपिंग बीएलओ (BLO) की कोशिशों के बावजूद अब तक नहीं हो पाई है।
- दूसरे चरण का आगाज: 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 तक अभियान का दूसरा चरण शुरू हो गया है। इसमें उन लोगों पर फोकस किया जा रहा है जो घर पर नहीं मिले या जिनके पास 2003 के दस्तावेज नहीं हैं।
- मैदानी जिले पीछे: देहरादून (57%) और ऊधमसिंह नगर (59%) जैसे मैदानी जिलों में मैपिंग की रफ्तार सबसे धीमी है। यहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी मतदाता हैं, जिन्हें ट्रेस करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
क्यों कट सकता है आपका नाम?
- अपात्रता की आशंका: यदि कोई मतदाता अपनी मैपिंग नहीं कराता है या 2003 की सूची से उसका लिंक स्थापित नहीं होता (और वह राज्य का पुराना निवासी होने का दावा करता है), तो उसे ‘अपात्र’ माना जा सकता है।
- डुप्लीकेट प्रविष्टियां: मैपिंग का उद्देश्य उन लोगों को हटाना है जिनका नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज है। अगर आप वेरिफिकेशन के समय उपलब्ध नहीं होते हैं, तो आपका नाम सूची से हटाया जा सकता है।
- सर्विस वोटर और प्रवासी: जो लोग दूसरे राज्यों से आकर यहाँ बसे हैं या जो सर्विस वोटर हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
मतदाताओं को क्या करना चाहिए?
- बीएलओ से संपर्क: यदि आपके घर अभी तक बीएलओ नहीं पहुंचे हैं, तो तुरंत अपने बूथ लेवल ऑफिसर से संपर्क करें।
- दस्तावेज तैयार रखें: अपने आधार कार्ड के साथ-साथ यदि संभव हो तो पुराने मतदाता पहचान पत्र या 2003 के आसपास के निवास प्रमाण पत्र दिखाएं।
- युवा और महिलाएं ध्यान दें: इस दूसरे चरण में खासतौर पर 18-19 साल के युवाओं और विवाहित महिलाओं (जिनका मायके और ससुराल दोनों जगह नाम हो सकता है) की मैपिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की चेतावनी: अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए अनिवार्य है। जो मतदाता इस दौरान सहयोग नहीं करेंगे या जिनका सत्यापन नहीं हो पाएगा, उनका नाम आगामी अंतिम मतदाता सूची से बाहर किया जा सकता है।





