रोम/कैम्पानिया: इटली के दक्षिणी क्षेत्र कैम्पानिया के एक स्थानीय चर्च में लगी एक नई पेंटिंग ने देश में एक बड़ा राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस तस्वीर में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को एक ‘फरिश्ते’ (Angel) के रूप में चित्रित किया गया है। जैसे ही यह कलाकृति सार्वजनिक हुई, विपक्षी दलों और नागरिक समाज के एक बड़े वर्ग ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आलोचकों का तर्क है कि धार्मिक स्थलों का उपयोग राजनीतिक महिमामंडन के लिए करना अनुचित है। साथ ही, इस घटना ने इटली के काले इतिहास की उन यादों को ताजा कर दिया है जब तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी का महिमामंडन भी इसी तरह धार्मिक प्रतीकों के जरिए किया जाता था।
विवाद की जड़: क्या है उस तस्वीर में?
चर्च की दीवार पर लगाई गई इस पेंटिंग में बाइबिल के एक दृश्य को आधुनिक संदर्भ में दिखाने की कोशिश की गई है:
- मेलोनी का चेहरा: पेंटिंग में दिख रहे एक मुख्य फरिश्ते का चेहरा हूबहू जॉर्जिया मेलोनी जैसा बनाया गया है।
- कलाकार का तर्क: पेंटिंग बनाने वाले कलाकार ने इसे “शक्तिशाली महिला नेतृत्व के प्रति सम्मान” बताया है, लेकिन चर्च जाने वाले कई श्रद्धालुओं ने इसे ‘ईशनिंदा’ और ‘चाटुकारिता’ करार दिया है।
- सोशल मीडिया पर विरोध: तस्वीर के वायरल होते ही ‘हैशटैग चर्च पॉलिटिक्स’ इटली में ट्रेंड करने लगा, जहाँ लोग इसे आस्था का राजनीतिकरण बता रहे हैं।
मुसोलिनी से क्या है कनेक्शन?
इटली के इतिहासकार और विपक्षी नेता इस घटना को एक खतरनाक संकेत के रूप में देख रहे हैं:
- तानाशाही का दौर: 1920 और 30 के दशक में फासीवादी तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी ने अपनी छवि को ‘ईश्वर द्वारा भेजे गए रक्षक’ के रूप में स्थापित करने के लिए चर्च और कला का सहारा लिया था।
- प्रचार की राजनीति: आलोचकों का कहना है कि मेलोनी की पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ की जड़ें दक्षिणपंथी विचारधारा में हैं, और चर्च में उनकी तस्वीर लगाना उसी पुराने ‘पर्सनैलिटी कल्ट’ (व्यक्ति पूजा) को पुनर्जीवित करने की कोशिश है।
- लोकतंत्र पर सवाल: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक देशों में नेताओं को सेवक माना जाना चाहिए, न कि पूजनीय देवता या फरिश्ता।
चर्च और सरकार की प्रतिक्रिया
विवाद बढ़ने के बाद चर्च प्रशासन बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है:
- पादरी का बयान: स्थानीय पादरी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विचारधारा को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि यह केवल कलाकार की अपनी कल्पना थी।
- सरकार की चुप्पी: प्रधानमंत्री कार्यालय या मेलोनी की पार्टी की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, हालांकि उनके समर्थकों ने इसे कलाकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताया है।
जनता में भारी आक्रोश
चर्च के बाहर कई लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए मांग की है कि इस पेंटिंग को तुरंत हटाया जाए या प्रधानमंत्री के चेहरे को बदला जाए। लोगों का मानना है कि पवित्र स्थानों को समकालीन राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
“यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतिहास खुद को दोहरा रहा है। चर्च शांति और प्रार्थना की जगह है, किसी राजनेता के पीआर कैंपेन (PR Campaign) का हिस्सा नहीं। मेलोनी की फरिश्ते के रूप में तस्वीर लगाना सीधे तौर पर मुसोलिनी युग की याद दिलाता है।” — एक इतालवी राजनीतिक विश्लेषक





