वॉशिंगटन/नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों के एक नए अध्याय का आगाज हो गया है। लंबे समय से प्रतीक्षित ‘ऐतिहासिक ट्रेड डील’ पर दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस बड़ी कूटनीतिक जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश और दुनिया को संबोधित करते हुए आत्मविश्वास का संदेश दिया। पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता केवल दो देशों के बीच व्यापार का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि यह ‘नए भारत’ की वैश्विक स्वीकार्यता और सामर्थ्य का प्रमाण है। उन्होंने जोर देकर कहा, “यदि खुद पर विश्वास हो और इरादे नेक हों, तो दुनिया में सबकुछ संभव है।”
ट्रेड डील की बड़ी बातें: क्या सस्ता होगा और क्या बढ़ेगा?
इस समझौते के तहत दोनों देशों ने कई प्रमुख क्षेत्रों में शुल्क (Tariffs) कम करने और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर सहमति जताई है:
- भारतीय निर्यात को पंख: भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले रत्न-आभूषण, कपड़ा (Textiles), और इंजीनियरिंग सामानों पर शुल्क में भारी कटौती की गई है।
- सस्ता होगा अमेरिकी सामान: भारत में अमेरिकी सेब, अखरोट, और उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दाम कम होने की उम्मीद है।
- आईटी और सेवा क्षेत्र: भारतीय आईटी पेशेवरों और स्टार्टअप्स के लिए अमेरिकी बाजार में काम करने की प्रक्रिया को और सरल बनाया गया है।
“संकट को अवसर में बदला”: प्रधानमंत्री का संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए इसके दूरगामी परिणामों पर चर्चा की:
- आत्मनिर्भरता और ग्लोबल चेन: पीएम ने कहा कि भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का एक विश्वसनीय और मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है।
- युवाओं को अवसर: प्रधानमंत्री के अनुसार, इस डील से भारत में लाखों नए रोजगार पैदा होंगे, विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में।
- विश्वास की शक्ति: पीएम ने अपने संबोधन में बार-बार ‘आत्मविश्वास’ पर जोर देते हुए कहा कि भारतीयों ने अपनी मेहनत से दुनिया का भरोसा जीता है, जिसका परिणाम यह ट्रेड डील है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता
समझौते पर हस्ताक्षर से पहले पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें व्यापार के अलावा रक्षा और अंतरिक्ष (Space) सहयोग पर भी चर्चा की गई:
- तकनीक का आदान-प्रदान: दोनों देश सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में मिलकर काम करने पर सहमत हुए हैं।
- रणनीतिक साझेदारी: अमेरिका ने भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण ‘व्यापारिक और रणनीतिक साझेदार’ बताया है।
विशेषज्ञों की राय: भारत के लिए गेम चेंजर
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस डील के बाद भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ को अतिरिक्त गति मिलेगी:
- निर्यात में वृद्धि: विशेषज्ञों के अनुसार, अगले दो वर्षों में भारत का निर्यात अमेरिका को 15-20% तक बढ़ सकता है।
- विदेशी निवेश (FDI): अमेरिकी कंपनियां अब भारत में अपनी विनिर्माण इकाइयां लगाने के लिए और अधिक प्रोत्साहित होंगी।
“यह समझौता 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाओं में से एक है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी शर्तों पर यह डील सुनिश्चित की है, जो हमारे राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखती है।” — वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, भारत सरकार





