पोर्ट ब्लेयर: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में सोमवार सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.6 मापी गई है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, झटके इतने महसूस किए जा सकने वाले थे कि लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक कहीं से भी किसी बड़े जान-माल के नुकसान या सुनामी की चेतावनी जैसी स्थिति सामने नहीं आई है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है और तटीय इलाकों की निगरानी की जा रही है।
भूकंप का केंद्र और गहराई
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने इस भूकंप के तकनीकी आंकड़ों को साझा करते हुए बताया है:
- समय: भूकंप सुबह के समय दर्ज किया गया, जब अधिकांश लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे।
- केंद्र (Epicenter): भूकंप का केंद्र अंडमान सागर के पास स्थित था।
- गहराई: जमीन के नीचे भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर से 30 किलोमीटर के बीच मापी गई है। कम गहराई पर भूकंप होने के कारण इसके झटके सतह पर साफ तौर पर महसूस किए गए।
दहशत में आए लोग, घरों से भागे बाहर
भूकंप के झटके महसूस होते ही पोर्ट ब्लेयर और आसपास के द्वीपों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
- स्थानीय लोगों का अनुभव: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खिड़की-दरवाजे अचानक हिलने लगे और अलमारियों में रखा सामान नीचे गिरने लगा। कई होटलों और रिहायशी सोसायटियों में लोग सुरक्षा के मद्देनजर खुले मैदानों में जमा हो गए।
- प्रशासनिक सतर्कता: आपदा प्रबंधन विभाग ने तुरंत सक्रिय होते हुए सभी संवेदनशील इलाकों से रिपोर्ट मांगी है। तटीय पुलिस और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे जर्जर इमारतों और ऊंचे ढांचों का निरीक्षण करें।
क्यों संवेदनशील है यह क्षेत्र?
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भूकंपीय दृष्टि से बेहद सक्रिय क्षेत्र (Seismic Zone V) में आता है।
- टेक्टोनिक प्लेट्स: यह क्षेत्र भारतीय प्लेट और बर्मी प्लेट के मिलन स्थल पर स्थित है, जिसके कारण यहाँ अक्सर टेक्टोनिक हलचल होती रहती है।
- पुराना इतिहास: साल 2004 में आए विनाशकारी भूकंप और सुनामी के बाद से इस क्षेत्र में आने वाले छोटे से छोटे झटके को भी प्रशासन और वैज्ञानिक बेहद गंभीरता से लेते हैं।
विशेषज्ञों की राय और सावधानी
भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि 4.6 तीव्रता के भूकंप आमतौर पर बड़ी क्षति नहीं पहुंचाते, लेकिन इनके बाद आने वाले ‘आफ्टरशॉक्स’ (Aftershocks) से सावधान रहने की जरूरत है।
“अंडमान में भूकंप आना एक सामान्य भौगोलिक प्रक्रिया है, लेकिन लोगों को सतर्क रहना चाहिए। यदि झटके दोबारा महसूस हों, तो मजबूत मेज के नीचे शरण लें या खुले स्थान पर चले जाएं। घबराने के बजाय सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करें।” — भूकंप विज्ञानी





