Saturday, January 31, 2026

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तिरुपति प्रसादम विवाद: “करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ हुआ क्रूर मजाक”; टीटीडी अध्यक्ष ने मिलावट को बताया सनातन धर्म का अपमान

तिरुपति/अमरावती: विश्व प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के लड्डू प्रसादम में कथित मिलावट के मामले ने अब एक बड़े राजनीतिक और धार्मिक विवाद का रूप ले लिया है। टीटीडी के नवनियुक्त अध्यक्ष ने इस घटना पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए इसे ‘श्रद्धा के साथ खिलवाड़’ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रसादम की पवित्रता भंग करना न केवल एक प्रशासनिक चूक है, बल्कि यह दुनिया भर में फैले करोड़ों हिंदू भक्तों की भावनाओं पर सीधा प्रहार है। इस खुलासे के बाद से ही पूरे देश में आक्रोश की लहर है और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की जा रही है।

क्या है पूरा विवाद: लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

विवाद की शुरुआत तब हुई जब तिरुपति मंदिर को सप्लाई किए जाने वाले घी के नमूनों की जांच गुजरात की एक प्रयोगशाला (NDDB) में कराई गई।

  • मिलावट की पुष्टि: लैब रिपोर्ट में कथित तौर पर यह बात सामने आई कि घी में जानवरों की चर्बी (Animal Fat) और मछली के तेल के अंश मौजूद थे।
  • भक्तों का अपमान: टीटीडी अध्यक्ष ने कहा कि भक्त जिस प्रसादम को मोक्ष का साधन मानते हैं, उसमें इस तरह की अशुद्धता मिलाना अक्षम्य अपराध है।

टीटीडी अध्यक्ष का कड़ा रुख: “सफाई अभियान” शुरू

तिरुपति देवस्थानम के अध्यक्ष ने पदभार संभालते ही इस मुद्दे पर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं:

  1. पवित्रता की बहाली: मंदिर परिसर में ‘शांति होमम’ और ‘शुद्धिकरण अनुष्ठान’ किए जा रहे हैं ताकि प्रसादम की आध्यात्मिक शुद्धि सुनिश्चित की जा सके।
  2. नई लैब की स्थापना: टीटीडी अब मंदिर परिसर के भीतर ही एक अत्याधुनिक घी परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने जा रहा है, ताकि बाहर से आने वाले हर कच्चे माल की कड़ाई से जांच हो सके।
  3. दोषियों पर शिकंजा: अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि पिछले कार्यकाल के दौरान जिन ठेकेदारों ने घटिया और मिलावटी घी की आपूर्ति की, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के साथ-साथ उन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएंगे।

सनातन धर्म पर प्रहार: संतों और भक्तों में रोष

इस घटना ने देश भर के साधु-संतों को भी उद्वेलित कर दिया है।

  • भक्तों की मांग: श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान वेंकटेश्वर के प्रसादम की गरिमा को ठेस पहुँचाना हिंदू परंपराओं को कमजोर करने की एक साजिश है।
  • पारदर्शिता की जरूरत: भक्तों ने मांग की है कि प्रसादम बनाने की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पृष्ठभूमि की जांच हो।

भविष्य की तैयारी: प्रसादम की गुणवत्ता पर सख्त पहरा

टीटीडी अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि अब से केवल नंदिनी (KMF) जैसे विश्वसनीय ब्रांडों या उच्च गुणवत्ता वाले शुद्ध देसी घी का ही उपयोग किया जाएगा।

  • गुणवत्ता सर्वोपरि: उन्होंने कहा, “भले ही प्रसादम की लागत बढ़ जाए, लेकिन हम इसकी गुणवत्ता और पवित्रता के साथ एक इंच भी समझौता नहीं करेंगे।”
  • श्रद्धा का सम्मान: मंदिर प्रशासन ने एक विशेष निगरानी सेल का गठन किया है जो प्रसादम निर्माण की 24 घंटे निगरानी करेगा।

“यह केवल मिलावट का मामला नहीं है, यह करोड़ों भक्तों के विश्वास का अपमान है। पिछली सरकार के दौरान जिस तरह से आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया, उसकी जांच के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। हम तिरुपति की दिव्यता और पवित्रता को पुनः स्थापित करेंगे।” — अध्यक्ष, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD)

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