Saturday, January 31, 2026

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महायुद्ध के अंत की आहट: रूस जाएंगे जेलेंस्की; पुतिन के साथ ‘प्राइवेट मीटिंग’ में तय होगा शांति का रोडमैप!

कीव/मॉस्को: पिछले लगभग चार वर्षों से जारी विनाशकारी युद्ध के बीच दुनिया के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की जल्द ही रूस की यात्रा पर जा सकते हैं, जहाँ वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक अत्यंत गोपनीय और ‘प्राइवेट’ बैठक करेंगे। कूटनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को युद्ध विराम (Ceasefire) और शांति समझौते की दिशा में ‘अंतिम और सबसे बड़ा कदम’ माना जा रहा है। यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो 2022 से चल रहा यह खूनी संघर्ष आधिकारिक रूप से समाप्त हो सकता है।

मुलाकात का एजेंडा: क्या होगा मेज पर?

सूत्रों के अनुसार, यह बैठक किसी सार्वजनिक मंच पर होने के बजाय एक एकांत स्थान पर होगी ताकि दोनों नेता बिना किसी बाहरी दबाव के सीधे संवाद कर सकें।

  • क्षेत्रीय समझौता: बैठक का मुख्य मुद्दा उन क्षेत्रों (जैसे डोनबास और क्रीमिया) का भविष्य होगा, जो वर्तमान में विवाद का केंद्र हैं।
  • सुरक्षा गारंटी: यूक्रेन अपनी संप्रभुता के लिए ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी की मांग कर सकता है, जबकि रूस अपनी सीमाओं के पास नाटो (NATO) के विस्तार को रोकने की शर्त रख सकता है।
  • कैदियों की अदला-बदली: पूर्ण युद्ध विराम से पहले दोनों देश एक-दूसरे के सभी युद्धबंदियों को रिहा करने के फॉर्मूले पर चर्चा कर सकते हैं।

मध्यस्थों की भूमिका: पर्दे के पीछे की कहानी

इस ऐतिहासिक मुलाकात को संभव बनाने में कई वैश्विक शक्तियों ने पर्दे के पीछे से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  1. भारत और तुर्की की पहल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन लंबे समय से दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने का प्रयास कर रहे थे।
  2. अमेरिका का नया रुख: वाशिंगटन में सत्ता परिवर्तन के बाद अब यूक्रेन पर युद्ध खत्म करने और कूटनीतिक रास्ता चुनने का दबाव बढ़ा है।
  3. यूरोपीय संघ का समर्थन: युद्ध की आर्थिक मार झेल रहे यूरोपीय देशों ने भी इस पहल का स्वागत किया है।

जेलेंस्की का रूस जाना क्यों है जोखिम भरा?

राष्ट्रपति जेलेंस्की का रूस की धरती पर कदम रखना एक साहसी लेकिन जोखिम भरा निर्णय माना जा रहा है।

  • राजनीतिक जोखिम: यूक्रेन के भीतर एक धड़ा अभी भी रूस से किसी भी तरह के समझौते के खिलाफ है। जेलेंस्की को अपने देश के लोगों को यह समझाना होगा कि यह शांति देश के हित में है।
  • सुरक्षा चिंताएं: युद्ध के माहौल में रूस की यात्रा करना सुरक्षा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां विशेष प्रोटोकॉल तैयार कर रही हैं।

विश्व बाजार में उत्साह की लहर

शांति वार्ता की खबर फैलते ही वैश्विक शेयर बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों में सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध खत्म होने से दुनिया भर में छाई आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई के दौर पर लगाम लगेगी।

“युद्ध केवल बर्बादी लाता है, समाधान बातचीत से ही निकलता है। अगर जेलेंस्की और पुतिन आमने-सामने बैठकर बात करते हैं, तो यह इस सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। पूरी दुनिया इस मुलाकात के नतीजों का इंतजार कर रही है।” — अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक

आगे क्या होगा?

फिलहाल दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने बैठक की तारीख और स्थान को गुप्त रखा है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों में इस ‘ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन’ की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

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