नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और अटकलों पर विराम लगाते हुए वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी नेतृत्व के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। थरूर ने गुरुवार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकाजुर्न खरगे से उनके आवास पर मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस उच्च स्तरीय मुलाकात के बाद बाहर आए शशि थरूर के सुर बदले हुए नजर आए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक है और उनके व नेतृत्व के बीच किसी भी तरह के मतभेद की खबरें केवल कोरी अफवाहें हैं।
मुलाकात के पीछे का कारण: संगठन और भविष्य की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, यह बैठक थरूर को पार्टी की मुख्यधारा और आगामी चुनावी रणनीतियों में सक्रिय भूमिका देने के उद्देश्य से बुलाई गई थी।
- संगठनात्मक एकजुटता: बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी के सभी शीर्ष नेताओं का एक मंच पर दिखना जरूरी है।
- थरूर की भूमिका: चर्चा है कि कांग्रेस नेतृत्व थरूर की अंतरराष्ट्रीय छवि और उनकी विद्वता का उपयोग पार्टी के नीति निर्धारण और मेनिफेस्टो कमेटी में बड़े स्तर पर करना चाहता है।
“परिवार में संवाद जरूरी”: थरूर का बयान
मुलाकात के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने मुस्कुराते हुए कहा:
- सब ठीक है: “मैंने राहुल गांधी और खरगे जी के साथ बहुत सार्थक चर्चा की है। हमारे बीच सब कुछ सामान्य है और हम एक परिवार की तरह हैं। किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र और पार्टी में संवाद होना जरूरी है।”
- लक्ष्य 2026-27: थरूर ने आगे कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य पार्टी को मजबूत करना और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाना है।
- गिले-शिकवे दूर: उन्होंने उन अटकलों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि वे पार्टी की कार्यप्रणाली से नाराज चल रहे हैं।
क्यों अहम है यह मुलाकात?
राजनीतिक पंडित इस मुलाकात को कांग्रेस के ‘डैमेज कंट्रोल’ के रूप में देख रहे हैं।
- G-23 का संदर्भ: थरूर उस समूह का हिस्सा रहे थे जिसने पूर्व में सांगठनिक बदलावों की मांग की थी। ऐसे में नेतृत्व के साथ उनकी यह नजदीकी यह संदेश देती है कि पार्टी अब पुराने विवादों को पीछे छोड़ चुकी है।
- दक्षिण भारत की राजनीति: केरल और अन्य दक्षिणी राज्यों में थरूर का बड़ा जनाधार है। राहुल गांधी और खरगे के साथ उनकी केमिस्ट्री पार्टी के लिए दक्षिण भारत में मजबूती का संकेत है।
भाजपा के हमलों का जवाब
कांग्रेस प्रवक्ता ने भी इस मुलाकात को एक रूटीन चर्चा बताते हुए कहा कि भाजपा कांग्रेस में फूट देखने का सपना देख रही है, जो कभी सच नहीं होगा। पार्टी नेतृत्व अब उन सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चल रहा है जो पिछले कुछ समय से हाशिए पर महसूस कर रहे थे।
“शशि थरूर पार्टी की एक बेशकीमती संपत्ति हैं। राहुल जी और खरगे जी के साथ उनकी बातचीत पार्टी को नई ऊर्जा देने वाली है। हम पूरी ताकत और एकजुटता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।” — अधिकारी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC)
आगे की राह
बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद थरूर को जल्द ही किसी महत्वपूर्ण राज्य का चुनाव प्रभारी या राष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़ी समिति का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पार्टी अब अपने ‘बौद्धिक चेहरे’ को फ्रंट फुट पर रखकर मध्यम वर्ग और युवाओं के बीच अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है।





