Thursday, March 5, 2026

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पेंशन रोकने के फैसले पर हाई कोर्ट का ‘स्टे’: वर्कचार्ज कर्मचारियों को बड़ी राहत; राज्य सरकार से चार सप्ताह में मांगा जवाब

नैनीताल: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य के हजारों वर्कचार्ज (कार्यप्रभारित) कर्मचारियों के पक्ष में एक बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने सरकार द्वारा इन कर्मचारियों की पेंशन बंद करने के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के इस फैसले से उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी आजीविका का एकमात्र सहारा उनकी मासिक पेंशन थी।

क्या है पूरा विवाद?

मामले के अनुसार, राज्य सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि वर्कचार्ज के रूप में की गई सेवाओं को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा (Qualifying Service) में नहीं जोड़ा जाएगा।

  • सरकार का तर्क: सरकार का मानना था कि जो कर्मचारी नियमित होने से पहले वर्कचार्ज श्रेणी में थे, उनकी उस अवधि की सेवा पेंशन गणना के दायरे में नहीं आती।
  • पेंशन पर संकट: इस आदेश के लागू होने से उन कर्मचारियों की पेंशन या तो बहुत कम हो रही थी या पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुँच गई थी।

कर्मचारियों की दलील: “यह मौलिक अधिकारों का हनन”

सरकार के इस फैसले के खिलाफ कई कर्मचारी संगठनों और सेवानिवृत्त कर्मियों ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।

  1. सुप्रीम कोर्ट के नजीर का हवाला: याचिकाओं में तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट और स्वयं हाई कोर्ट के पूर्व के आदेशों के अनुसार, वर्कचार्ज सेवा को पेंशन के लिए गिना जाना अनिवार्य है।
  2. अनुचित कटौती: याचिकाकर्ताओं ने कहा कि दशकों तक सेवा देने के बाद अंतिम समय में पेंशन रोकना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।

अदालत का कड़ा रुख

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया कर्मचारियों की दलीलों में दम पाया।

  • अंतरिम रोक: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई तक किसी भी कर्मचारी की पेंशन नहीं रोकी जाएगी और न ही पहले से दी जा रही पेंशन में कोई कटौती की जाएगी।
  • जवाबदेही तय: कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि किन परिस्थितियों और किस नियम के तहत पूर्व के न्यायिक फैसलों के विपरीत यह नया आदेश जारी किया गया।

हजारों परिवारों पर सीधा असर

उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई विभाग और जल संस्थान जैसे बड़े विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्कचार्ज के रूप में नियुक्त हुए थे, जो बाद में नियमित हुए।

  • आर्थिक सुरक्षा: इस आदेश से लगभग 15,000 से अधिक वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिवार प्रभावित हो रहे थे।
  • खुशी की लहर: हाई कोर्ट के स्टे की खबर मिलते ही कर्मचारी संगठनों ने इसे न्याय की जीत बताया है।

आगे क्या होगा?

अब सभी की निगाहें सरकार के जवाब पर टिकी हैं। सरकार को यह साबित करना होगा कि उसका आदेश कानूनी रूप से वैध है। यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं दे पाती है, तो कोर्ट इस आदेश को पूरी तरह निरस्त भी कर सकता है।

“अदालत का यह फैसला उन बुजुर्ग कर्मचारियों के लिए जीवनदान जैसा है, जो अपनी पूरी सेवा देने के बाद पेंशन के लिए दर-दर भटक रहे थे। हमें पूरा भरोसा है कि अंतिम फैसला भी कर्मचारियों के हक में ही आएगा।” — अधिवक्ता, याचिकाकर्ता पक्ष

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