अल्मोड़ा: उत्तराखंड में गर्मी के दस्तक देने से पहले ही वन विभाग और जिला प्रशासन ने जंगलों को आग से बचाने के लिए कमर कस ली है। अल्मोड़ा जिले में वनाग्नि (Forest Fire) की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए इस बार व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। विभाग ने पूरे जिले में 550 फायर वाचरों की तैनाती कर दी है, जो चौबीसों घंटे जंगलों की निगरानी करेंगे। खास बात यह है कि इस बार विभाग के पास प्रशिक्षित 184 आपदा मित्रों की भी अतिरिक्त शक्ति होगी, जो किसी भी आपात स्थिति में आग बुझाने के लिए सबसे पहले मौके पर पहुँचेंगे।
निगरानी का मजबूत चक्र: क्रू-स्टेशन और कंट्रोल रूम
वनाग्नि की त्वरित सूचना और कार्यवाही के लिए जिले को कई जोन में बांटा गया है:
- क्रू-स्टेशन सक्रिय: जिले के संवेदनशील इलाकों में क्रू-स्टेशन बनाए गए हैं, जहाँ आग बुझाने के उपकरणों के साथ टीमें तैनात रहेंगी।
- 24×7 कंट्रोल रूम: जिला मुख्यालय पर एक केंद्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो सैटेलाइट से मिलने वाली ‘फायर अलर्ट’ पर तुरंत प्रतिक्रिया देगा।
फायर वाचर और आपदा मित्र: सुरक्षा की दोहरी दीवार
- 550 फायर वाचर: इन्हें मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में तैनात किया गया है जहाँ चीड़ के जंगलों की बहुतायत है और आग लगने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इनका मुख्य कार्य गश्त करना और आग की शुरुआती सूचना देना है।
- 184 आपदा मित्र: ये स्थानीय युवा हैं जिन्हें आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये न केवल आग बुझाने में माहिर हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू ऑपरेशन में भी सहयोग करेंगे।
आधुनिक उपकरणों और सुरक्षा किट का वितरण
वन विभाग ने इस बार टीमों को आधुनिक तकनीक और सुरक्षा उपकरणों से लैस किया है। फायर वाचरों को ‘फायर रैक’, ‘ब्लोअर’ और विशेष सुरक्षा किट प्रदान की गई है। इसके साथ ही जंगलों के बीच ‘फायर लाइन’ (आग को फैलने से रोकने के लिए काटी गई पट्टी) की सफाई का काम भी युद्ध स्तर पर पूरा कर लिया गया है।
जनसहयोग की अपील: ग्रामीणों के साथ बैठकें
जिला प्रशासन ने माना है कि बिना जनसहयोग के वनाग्नि पर काबू पाना असंभव है।
- जागरूकता अभियान: वन पंचायतों और महिला मंगल दलों के साथ बैठकें की जा रही हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कूड़ा या सूखी घास जलाते समय सावधानी बरतें।
- सजा का प्रावधान: विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई जानबूझकर जंगल में आग लगाता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा।
पर्यटकों के लिए भी दिशा-निर्देश
अल्मोड़ा आने वाले पर्यटकों को भी हिदायत दी गई है कि वे पिकनिक या कैंपिंग के दौरान जंगलों में आग न जलाएं। सड़क किनारे जलती हुई बीड़ी या सिगरेट फेंकने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।
“हमारा लक्ष्य इस साल वनाग्नि से होने वाले नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाना है। 550 फायर वाचरों की तैनाती और आपदा मित्रों के सहयोग से हम किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं। सैटेलाइट आधारित सूचना तंत्र हमें आग लगने के 15-20 मिनट के भीतर अलर्ट कर देता है।” — डीएफओ (DFO), अल्मोड़ा





