देहरादून/श्रीनगर: उत्तर भारत में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तराखंड से लेकर कश्मीर तक पहाड़ों ने सफेद चादर ओढ़ ली है। बाबा केदार की नगरी केदारनाथ धाम में पिछले 24 घंटों में हुई भारी बर्फबारी के बाद बर्फ की परत 4 फीट तक पहुँच गई है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटों में बर्फबारी का यह सिलसिला और तेज होगा, जबकि 1 फरवरी से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली समेत कई मैदानी राज्यों में झमाझम बारिश होने की संभावना है।
केदारनाथ में जनजीवन प्रभावित, थमा पुनर्निर्माण कार्य
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का रौद्र और सुंदर रूप एक साथ देखने को मिल रहा है।
- बर्फ का साम्राज्य: केदारनाथ मंदिर परिसर, वीआईपी हेलीपैड और आसपास की पहाड़ियां पूरी तरह बर्फ से ढकी हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार तक पहुँचने के लिए रास्तों को काटना पड़ रहा है।
- काम पर ब्रेक: भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण केदारनाथ में चल रहे दूसरे चरण के पुनर्निर्माण कार्य को अस्थाई रूप से रोक दिया गया है। वहां मौजूद मजदूरों और सुरक्षाकर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
कश्मीर और हिमाचल में भी ‘वाइट आउट’ के हालात
केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि समूचा हिमालयी बेल्ट इस समय बर्फीली हवाओं की चपेट में है।
- कश्मीर घाटी: गुलमर्ग और पहलगाम में भारी बर्फबारी के कारण तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला गया है। मुगल रोड और श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है।
- हिमाचल प्रदेश: रोहतांग दर्रा, अटल टनल और लाहौल-स्पीति में ताजा बर्फबारी ने पर्यटकों के चेहरे खिला दिए हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने हिमस्खलन (Avalanche) की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया है।
1 फरवरी से मैदानी इलाकों में बदलेगा मौसम
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पहाड़ों पर हो रही इस बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में बारिश के रूप में दिखेगा।
- बारिश का अलर्ट: 1 फरवरी से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं।
- शीतलहर की वापसी: बारिश के बाद चलने वाली ठंडी हवाओं (North-Westerly winds) के कारण फरवरी के पहले हफ्ते में कड़ाके की ठंड और शीतलहर की वापसी हो सकती है।
चारधाम यात्रियों और पर्यटकों के लिए एडवाइजरी
प्रशासन ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
- फिसलन का खतरा: बर्फबारी के बाद पाला जमने से सड़कों पर गाड़ियां फिसलने का खतरा बढ़ गया है, इसलिए ड्राइवरों को केवल दिन के समय यात्रा करने की सलाह दी गई है।
- आवश्यक सामग्री: पहाड़ों की ओर जा रहे लोग पर्याप्त गर्म कपड़े, दवाइयां और सूखे खाद्य पदार्थ साथ रखें।
किसानों के लिए ‘अमृत’ है यह मौसम
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में बारिश रबी की फसल, खासकर गेहूं के लिए ‘अमृत’ के समान है। इससे मिट्टी में नमी बनी रहेगी और पैदावार में सुधार होगा। हालांकि, ओलावृष्टि (Hailstorm) की स्थिति में फसलों को नुकसान की आशंका भी जताई गई है।
“पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ों पर बर्फबारी का एक और दौर शुरू हो गया है। 1 से 3 फरवरी के बीच उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में गरज के साथ छींटे पड़ने की पूरी संभावना है, जिससे तापमान में एक बार फिर गिरावट आएगी।” — निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र





