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उत्तरकाशी में फिर डोली धरती: भूकंप के झटकों से दहशत में आए लोग, सुरक्षित स्थानों की ओर दौड़े; जान-माल का नुकसान नहीं

उत्तरकाशी: उत्तराखंड के सीमावर्ती जनपद उत्तरकाशी में एक बार फिर कुदरत की आहट ने लोगों को खौफजदा कर दिया है। जिले के विभिन्न हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसके बाद लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर खुले मैदानों की ओर भागने लगे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस भूकंप से अब तक कहीं से भी किसी प्रकार की जनहानि या संपत्ति के बड़े नुकसान की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है।

भूकंप की तीव्रता और समय

जिला आपदा प्रबंधन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, भूकंप के झटके दोपहर के समय महसूस किए गए।

  • केंद्र और गहराई: भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी जिले के आसपास का पहाड़ी क्षेत्र बताया जा रहा है। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता मध्यम श्रेणी की मापी गई है।
  • क्षेत्रीय प्रभाव: जिला मुख्यालय सहित भटवाड़ी, डुंडा और चिन्यालीसौड़ जैसे इलाकों में झटके स्पष्ट रूप से महसूस किए गए। कई स्थानों पर खिड़की-दरवाजे और बर्तनों के खड़खड़ाने की आवाज से लोग दहशत में आ गए।

प्रशासन ने जारी किया अलर्ट

भूकंप के तुरंत बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया। जिलाधिकारी ने सभी तहसीलदारों और पटवारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में नुकसान का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं।

  1. संपर्क अभियान: आपदा कंट्रोल रूम के माध्यम से जिले के सुदूरवर्ती गांवों के प्रधानों से संपर्क साधा जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तुरंत मिल सके।
  2. बीआरओ और लोक निर्माण विभाग: संवेदनशील पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन (Landslides) की संभावना को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने को कहा गया है।

भूकंप के प्रति संवेदनशील है उत्तरकाशी

भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तरकाशी जिला भूकंपीय जोन-5 में आता है, जो सुरक्षा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है।

  • पुराने जख्म: साल 1991 में आए भीषण भूकंप की यादें आज भी स्थानीय लोगों के जहन में ताजा हैं, यही कारण है कि हल्के झटकों पर भी यहां लोग बेहद सतर्क हो जाते हैं।
  • सतर्कता ही बचाव: प्रशासन समय-समय पर मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ जैसी सुरक्षा तकनीकों के प्रति शिक्षित करता रहता है।

स्थानीय निवासियों का अनुभव

स्थानीय निवासी सोहन सिंह ने बताया, “हम दुकान में बैठे थे तभी अचानक कुर्सी और रैक हिलने लगे। महसूस हुआ कि यह भूकंप है, तो तुरंत बाहर की तरफ भागे।” इसी तरह स्कूल और सरकारी कार्यालयों में भी कुछ समय के लिए अफरातफरी का माहौल बना रहा, लेकिन स्थिति जल्द ही सामान्य हो गई।

मौसम और आपदा का दोहरा खतरा

वर्तमान में उत्तरकाशी के ऊपरी इलाकों में ठंड और बर्फबारी का भी दौर चल रहा है। ऐसे में भूकंप के झटके आने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है क्योंकि कड़ाके की ठंड के बीच किसी भी आपदा से निपटना एक बड़ी चुनौती होती है। फिलहाल, किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

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