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कर्तव्य पथ पर ‘महाशक्ति’ भारत का उदय: हाइपरसोनिक मिसाइलें, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और फेज्ड बैटल तकनीक से दुनिया दंग

नई दिल्ली: देश के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ ने भारत की उस सैन्य शक्ति का साक्षात्कार किया, जिसने वैश्विक रक्षा समीकरणों को बदल कर रख दिया है। इस वर्ष की परेड केवल पारंपरिक सैन्य मार्च-पास्ट तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह भविष्य के युद्धों के लिए भारत की अटूट तैयारी का प्रदर्शन थी। स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणाली, आधुनिक फेज्ड बैटल (Phased Battle) प्रबंधन और हिंद महासागर में भारत की बढ़ती धमक को दर्शाने वाले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।

हाइपरसोनिक मिसाइल: आवाज़ से पांच गुना तेज़ प्रहार

परेड का सबसे मुख्य आकर्षण भारत की पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का प्रदर्शन था।

  • अभेद्य सुरक्षा: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित यह मिसाइल दुनिया के किसी भी रडार या एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है।
  • ग्लोबल एलीट क्लब: इस प्रदर्शन के साथ भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह उन चुनिंदा देशों की कतार में मजबूती से खड़ा है, जिनके पास हाइपरसोनिक तकनीक मौजूद है।

फेज्ड बैटल तकनीक: डिजिटल युद्ध की नई परिभाषा

भारतीय सेना ने इस बार ‘फेज्ड बैटल’ (Phased Battle) प्रणाली के मोबाइल कमांड सेंटर का प्रदर्शन किया।

  1. एआई का समावेश: यह तकनीक युद्ध के मैदान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रियल-टाइम डेटा का उपयोग करके दुश्मन के ठिकानों को चरणों में (Phases) ध्वस्त करने की रणनीति तैयार करती है।
  2. सटीक मारक क्षमता: इस प्रणाली के माध्यम से थल, नभ और जल सेना के बीच ऐसा समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे हमले की सटीकता 99% तक बढ़ जाती है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’: हिंद महासागर का नया ‘सिक्योरिटी प्रोवाइडर’

नौसेना की झांकी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को प्रदर्शित कर भारत के समुद्री प्रभुत्व की कहानी सुनाई।

  • एंटी-पायरेसी और रेस्क्यू: यह ऑपरेशन हिंद महासागर और लाल सागर में समुद्री लुटेरों के खिलाफ भारत की हालिया सफलताओं और संकट में फंसे विदेशी जहाजों की रक्षा करने की क्षमता पर आधारित था।
  • स्वदेशी बेड़ा: झांकी में स्वदेशी विमानवाहक पोत और अत्याधुनिक पनडुब्बियों के मॉडल दिखाए गए, जो ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत की बढ़ती ताकत का प्रतीक हैं।

आकाश में गूंजा ‘तेजस’ और ‘प्रचंड’ का गर्जन

वायुसेना के फ्लाई-पास्ट ने आसमान में तिरंगा बनाया। तेजस मार्क-1ए लड़ाकू विमानों और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टरों ने ‘रुद्र’ और ‘त्रिशूल’ फॉर्मेशन बनाकर भारत की हवाई श्रेष्ठता का परिचय दिया।

“आज का प्रदर्शन केवल हथियारों का नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के आत्मविश्वास का है। हमारी तकनीक अब आयातित नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी है।” — रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी

 

परेड में पहली बार सीमा सुरक्षा बल (BSF) की ‘ऊंट टुकड़ी’ के साथ-साथ पूर्णतः महिला ड्रोन ऑपरेटर दस्ते ने भी हिस्सा लिया। यह दस्ता ‘फेज्ड बैटल’ के दौरान अग्रिम मोर्चे पर दुश्मन की रेकी करने और छोटे हथियारों से सटीक हमला करने में सक्षम है।

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