नई दिल्ली/मुंबई: भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा और मारक क्षमता को और अधिक घातक बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत INS महेंद्रगिरि पर अब स्वदेशी रूप से निर्मित ‘सुपर रैपिड गन माउंट’ (SRGM) को सफलतापूर्वक तैनात कर दिया गया है। इस शक्तिशाली हथियार के जुड़ने से भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी बादशाहत को और अधिक मजबूती से पेश कर सकेगी।
35 किलोमीटर तक अचूक निशाना
इस गन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मारक दूरी और सटीकता है। यह सुपर रैपिड गन 35 किलोमीटर की दूरी तक दुश्मन के किसी भी लक्ष्य को पूरी तरह ध्वस्त करने में सक्षम है। यह गन न केवल समुद्री जहाजों, बल्कि हवा में उड़ने वाली मिसाइलों और ड्रोन के विरुद्ध भी एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करती है। इसकी उच्च ‘रेट ऑफ फायर’ इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों के लिए अनिवार्य बनाती है।
पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित
‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, इस गन का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भेल (BHEL) द्वारा किया गया है। INS महेंद्रगिरि पर इसकी तैनाती भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमताओं का एक जीवंत प्रमाण है। यह गन अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल सिस्टम और रडार से लैस है, जो इसे दिन हो या रात, हर मौसम में सटीक वार करने की सुविधा प्रदान करता है।
INS महेंद्रगिरि: प्रोजेक्ट 17A का गौरव
INS महेंद्रगिरि, प्रोजेक्ट 17A के तहत बनाया गया सातवां और अंतिम स्टेल्थ फ्रिगेट है। इसे मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा निर्मित किया गया है। स्टेल्थ तकनीक से लैस होने के कारण यह युद्धपोत दुश्मन के रडार की नजरों से बच निकलने में माहिर है। अब इस पर सुपर रैपिड गन की तैनाती ने इसे ‘तैरते हुए किले’ में तब्दील कर दिया है।
सामरिक महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर में बढ़ती वैश्विक चुनौतियों और पड़ोसी देशों की बढ़ती सक्रियता के बीच, INS महेंद्रगिरि जैसे युद्धपोतों का आधुनिक हथियारों से लैस होना भारत की रणनीतिक बढ़त के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह युद्धपोत अब न केवल सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के खेमे में घुसकर उसे तबाह करने की क्षमता भी रखता है।
भारतीय नौसेना के बेड़े में इस गन का शामिल होना समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को एक नई ऊँचाई पर ले जाएगा।





