नई दिल्ली/श्रीनगर: उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में सर्दी का सितम एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में पिछले 24 घंटों से भारी बर्फबारी जारी है, जिससे कई मुख्य मार्ग बंद हो गए हैं। वहीं, मौसम विभाग (IMD) ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के लिए बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी के चलते मैदानी इलाकों में बर्फीली हवाएं चल रही हैं, जिससे न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। आने वाले दो दिनों तक उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में शीतलहर और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
पहाड़ों का हाल: सफेद चादर में लिपटी वादियां
हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी ने पर्यटकों के चेहरे तो खिला दिए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं:
- जम्मू-कश्मीर: गुलमर्ग, सोनमर्ग और पहलगाम में दो से तीन फीट तक नई बर्फ जमा हो गई है। श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन और बर्फबारी के कारण यातायात को एहतियातन रोक दिया गया है। कश्मीर घाटी का देश के अन्य हिस्सों से संपर्क कटने की कगार पर है।
- हिमाचल प्रदेश: लाहौल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू के ऊंचे क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हो रही है। अटल टनल के पास वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। शिमला और मनाली में भी कड़ाके की ठंड के साथ हल्की बर्फबारी शुरू हो गई है, जिससे बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हुई है।
- उत्तराखंड: बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम पूरी तरह बर्फ से ढके हुए हैं। प्रशासन ने ऊंचे इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
मैदानी इलाकों में संकट: बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी
पहाड़ों पर हो रही हलचल का असर अब दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में दिखने लगा है:
- दिल्ली-एनसीआर: मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में दिल्ली और एनसीआर के इलाकों में बादल छाए रहेंगे और गरज के साथ बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर ओले गिरने की भी आशंका है, जिससे ठंड का अहसास और गहरा जाएगा।
- उत्तर प्रदेश और हरियाणा: यूपी के पश्चिमी जिलों और हरियाणा के रोहतक, सोनीपत व पानीपत में बारिश का अलर्ट है। स्थानीय प्रशासन ने बेघर लोगों के लिए रैन बसेरों में पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
- विजिबिलिटी और ट्रैफिक: कोहरे और बारिश के कारण विजिबिलिटी (दृश्यता) कम रहने की संभावना है, जिससे लंबी दूरी की ट्रेनों और उड़ानों पर असर पड़ सकता है।
खेती और स्वास्थ्य पर प्रभाव
बेमौसम बारिश और पाला गिरने से किसानों और आम जनता के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है:
- फसलों की चिंता: कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हल्की बारिश गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन यदि ओलावृष्टि हुई तो सरसों और आलू की फसल को भारी नुकसान पहुँच सकता है।
- बढ़ती बीमारियां: अचानक तापमान गिरने और नमी बढ़ने से अस्पतालों में वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और अस्थमा के मरीजों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। डॉक्टरों ने विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों को घरों के अंदर रहने की सलाह दी है।
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद जब आसमान साफ होगा, तो उत्तर-पश्चिमी बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों में ‘कनकनी’ बढ़ाएंगी। इससे न्यूनतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की और गिरावट आ सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को ध्यान में रखते हुए ही अपनी यात्रा की योजना बनाएं और पहाड़ी क्षेत्रों की ओर जाने से बचें।





