Wednesday, March 4, 2026

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एआई की दुनिया में भारत का ‘मिशन मोड’: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पेश किया ग्लोबल विजन; 10,000 से अधिक जीपीयू (GPU) के साथ बनेगा विशाल कंप्यूटिंग ढांचा, ‘इंडिया एआई मिशन’ से बदलेगी देश की तस्वीर

नई दिल्ली: भारत अब केवल एआई का उपभोक्ता (Consumer) नहीं, बल्कि इस तकनीक का वैश्विक निर्माता और नेतृत्वकर्ता बनने की राह पर है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि भारत सरकार ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत एक विशाल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रही है, जो दुनिया के लिए एक मिसाल बनेगा। सरकार का लक्ष्य भारत को एआई के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के लिए किफायती और नैतिक एआई समाधान प्रदान करना है। इस योजना के तहत देश में अत्याधुनिक ‘एआई कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर’ स्थापित किया जाएगा, जो न केवल स्टार्टअप्स को शक्ति देगा बल्कि कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

अश्विनी वैष्णव के ‘ग्लोबल एआई प्लान’ के मुख्य स्तंभ

केंद्रीय मंत्री ने भारत की भविष्य की रणनीति को चार प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया है:

  1. विशाल कंप्यूटिंग क्षमता (Computing Power): सरकार 10,000 से अधिक जीपीयू (Graphics Processing Units) का एक संकुल (Cluster) स्थापित करने जा रही है। यह बुनियादी ढांचा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से बनाया जाएगा, जिससे भारतीय स्टार्टअप्स को एआई मॉडल विकसित करने के लिए महंगी विदेशी कंप्यूटिंग शक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
  2. स्वदेशी एआई मॉडल और डेटासेट्स: भारत अपनी भाषाई विविधता का लाभ उठाते हुए ‘भाषिणी’ जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए स्थानीय भाषाओं के डेटासेट्स तैयार कर रहा है। इससे ऐसे एआई मॉडल विकसित होंगे जो भारतीय भाषाओं, बोलियों और सांस्कृतिक परिवेश को समझ सकेंगे।
  3. एआई स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता: मंत्री ने बताया कि सरकार एआई के क्षेत्र में काम करने वाले नए उद्यमियों के लिए फंड की व्यवस्था कर रही है। इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि तकनीक का लाभ केवल महानगरों तक सीमित न रहे।

एआई का लोकतंत्रीकरण: ‘इंडिया स्टैक’ की तर्ज पर विकास

वैष्णव ने जोर देकर कहा कि भारत एआई का उपयोग ‘समाज के अंतिम छोर’ तक लाभ पहुँचाने के लिए करेगा:

  • कृषि: किसानों को मौसम के सटीक पूर्वानुमान और मिट्टी की सेहत की जानकारी देने के लिए एआई आधारित उपकरण।
  • स्वास्थ्य: एआई के माध्यम से बीमारियों का शीघ्र निदान और ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं।
  • शिक्षा: छात्रों के लिए व्यक्तिगत सीखने के अनुभव (Personalized Learning) की सुविधा।

नैतिक एआई और वैश्विक नेतृत्व (Global Leadership)

भारत दुनिया के सामने ‘जिम्मेदार एआई’ (Responsible AI) का मॉडल पेश करना चाहता है:

  1. सुरक्षा और गोपनीयता: केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई के विकास में डेटा गोपनीयता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार जल्द ही इसके लिए नियामक ढांचा (Regulatory Framework) तैयार करेगी।
  2. वैश्विक भागीदारी: भारत ‘ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन एआई’ (GPAI) के माध्यम से दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि तकनीक पर कुछ चंद कंपनियों का एकाधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि यह मानवता के कल्याण के लिए होनी चाहिए।
  3. कौशल विकास: सरकार लाखों युवाओं को एआई और डेटा साइंस में प्रशिक्षित करने के लिए बड़े स्तर पर कौशल विकास कार्यक्रम शुरू कर रही है।

 

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के इस ‘ग्लोबल प्लान’ से स्पष्ट है कि भारत तकनीक की इस चौथी औद्योगिक क्रांति में पीछे नहीं रहने वाला है। ‘इंडिया एआई मिशन’ के जरिए देश न केवल अपनी समस्याओं का समाधान करेगा, बल्कि पूरी दुनिया को एआई के नैतिक और प्रभावी उपयोग का रास्ता भी दिखाएगा। यह मिशन भारत को साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण इंजन साबित होगा।

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