कोच्चि/तिरुवनंतपुरम: केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोने की चोरी और वित्तीय हेरफेर के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत कार्रवाई करते हुए ईडी ने इस मामले के मुख्य आरोपी के ठिकानों पर छापेमारी की और उसकी कई अचल संपत्तियों को कुर्क (जब्त) कर लिया है। जांच एजेंसी को संदेह है कि मंदिर से चोरी किए गए सोने और उससे अर्जित अवैध धन का इस्तेमाल इन संपत्तियों को खरीदने में किया गया था। इस कार्रवाई के बाद मंदिर प्रशासन और स्थानीय राजनीति में हड़कंप मच गया है। ईडी अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस घोटाले के तार किसी बड़े गिरोह या प्रभावशाली व्यक्तियों से तो नहीं जुड़े हैं।
ईडी की छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई
जांच एजेंसी ने साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी के खिलाफ घेराबंदी की है:
- अचल संपत्तियों पर कब्जा: ईडी ने मुख्य आरोपी के स्वामित्व वाली भूमि, मकान और अन्य व्यावसायिक परिसरों को जब्त किया है। इन संपत्तियों की बाजार कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है।
- महत्वपूर्ण दस्तावेजों की बरामदगी: छापेमारी के दौरान कई ऐसे वित्तीय दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जो चोरी के धन के निवेश की पुष्टि करते हैं।
- बैंक खातों पर नजर: आरोपी और उसके करीबियों के बैंक खातों को भी खंगाला जा रहा है ताकि धन के लेन-देन (Money Trail) का स्पष्ट पता चल सके।
क्या है पूरा मामला?
सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी का यह मामला काफी समय से सुर्खियों में बना हुआ है:
- सोने का गायब होना: मंदिर के भंडार गृह या आभूषणों की मरम्मत के दौरान सोने की मात्रा में बड़ी कमी पाई गई थी। इसके बाद ही शुरुआती जांच शुरू हुई थी।
- मुख्य आरोपी की भूमिका: जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी ने अपनी पद स्थिति का फायदा उठाते हुए मंदिर के कीमती धातुओं और दान में मिले सोने में हेराफेरी की।
- मनी लॉन्ड्रिंग का शक: जब आरोपी की आय के स्रोतों और उसकी संपत्तियों के बीच भारी अंतर पाया गया, तब ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में लिया और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया।
मंदिर प्रबंधन और श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है:
- भक्तों में आक्रोश: विश्व प्रसिद्ध मंदिर से जुड़ी इस चोरी की खबर ने करोड़ों भक्तों को आहत किया है। लोग मांग कर रहे हैं कि मंदिर की पाई-पाई का हिसाब लिया जाए।
- प्रशासनिक सतर्कता: त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) ने भी मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं और ईडी को सहयोग करने का आश्वासन दिया है।
- भविष्य की सुरक्षा: इस घटना के बाद मंदिर के आभूषणों और भंडार गृह की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने और डिजिटल रिकॉर्ड बनाए रखने पर विचार किया जा रहा है।
प्रवर्तन निदेशालय की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि धार्मिक संस्थानों के धन के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संपत्तियों की जब्ती के बाद अब आरोपी की गिरफ्तारी और उससे पूछताछ के जरिए इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे अपराधों के लिए एक कड़ा संदेश साबित होगी।





