नई दिल्ली: लोकसभा की कार्यवाही में पारदर्शिता और सांसदों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘अटेंडेंस’ (उपस्थिति) के नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किया गया है। नए नियमों के मुताबिक, अब सांसदों की हाजिरी तभी दर्ज होगी जब वे सदन के भीतर अपनी निर्धारित सीट पर बैठे होंगे। यदि कोई सांसद सदन की कार्यवाही के दौरान हॉल, गलियारे या लॉबी में मौजूद रहता है, तो उसे ‘अनुपस्थित’ (Absent) माना जाएगा। लोकसभा सचिवालय ने इस नई बायोमेट्रिक और सेंसर-आधारित व्यवस्था को लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सदन के भीतर चर्चाओं के दौरान सदस्यों की उपस्थिति बढ़ाना और ‘अटेंडेंस रजिस्टर’ में हस्ताक्षर करके गायब हो जाने वाली पुरानी परंपरा को खत्म करना है।
कैसे काम करेगी यह नई हाई-टेक व्यवस्था?
संसद भवन की नई तकनीक अब सांसदों की हर हरकत पर नजर रखेगी:
- सेंसर-आधारित सीटें: नई लोकसभा में प्रत्येक सांसद की सीट पर अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। जैसे ही सांसद अपनी सीट पर बैठेंगे, सिस्टम स्वतः उनकी उपस्थिति दर्ज कर लेगा।
- बायोमेट्रिक एकीकरण: हाजिरी को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए इसे फिंगरप्रिंट या फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) से भी जोड़ा जा सकता है।
- लॉबी और गैलरी ‘नो-अटेंडेंस’ जोन: अब तक कई सांसद हाजिरी रजिस्टर पर साइन करके लॉबी में चर्चा करते रहते थे, लेकिन अब लॉबी में बिताया गया समय उपस्थिति में नहीं गिना जाएगा।
नियमों में सख्ती की आवश्यकता क्यों पड़ी?
सचिवालय ने यह फैसला सदन की गरिमा और कार्यकुशलता को ध्यान में रखकर लिया है:
- चर्चाओं में गंभीरता: अक्सर देखा जाता है कि महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान सदन में सांसदों की संख्या कम रहती है। नए नियम से सांसद चर्चा के दौरान अपनी सीटों पर मौजूद रहने के लिए बाध्य होंगे।
- सरकारी खर्च की जवाबदेही: सांसदों को मिलने वाले भत्ते उनकी सदन में उपस्थिति के आधार पर तय होते हैं। डिजिटल हाजिरी से भत्तों के भुगतान में पूरी सटीकता आएगी।
- संसदीय मर्यादा: बार-बार सदन से बाहर जाने और लॉबी में जमावड़ा लगाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा, जिससे सदन की कार्यवाही बिना किसी व्यवधान के चलेगी।
सांसदों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
इस फैसले ने गलियारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया पैदा कर दी है:
- सत्ता पक्ष का रुख: सरकार के करीबियों का मानना है कि यह ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में एक बड़ा कदम है और इससे कामकाज में पेशेवर दृष्टिकोण आएगा।
- विपक्ष की चिंता: कुछ विपक्षी सदस्यों का तर्क है कि सांसदों को कई बार कार्यों के सिलसिले में मंत्रियों से या अन्य सदस्यों से लॉबी में बात करनी पड़ती है, जिसे ‘अनुपस्थिति’ मानना व्यावहारिक नहीं है।
लोकसभा का यह नया नियम सांसदों के लिए एक चुनौती और जिम्मेदारी दोनों है। अब सदन की कार्यवाही में केवल नाम दर्ज कराना काफी नहीं होगा, बल्कि ‘सीट पर मौजूदगी’ ही उनकी सक्रियता का प्रमाण मानी जाएगी। आने वाले सत्र में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस तकनीक के लागू होने के बाद सदन के भीतर सांसदों की संख्या बल में कितना सुधार आता है।





