गंगटोक/नई दिल्ली: भारत की सुरक्षा और जांच एजेंसियों ने एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान नार्को-तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाहियों में से एक को अंजाम दिया है। लगभग 13,000 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट में वांछित मुख्य आरोपी को सिक्किम के एक छिपे हुए ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान बदलकर हिमालयी राज्य में शरण लिए हुए था और वहीं से अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था। इस गिरफ्तारी के साथ ही अंतरराष्ट्रीय नार्को-ट्रैफिकिंग के एक ऐसे जाल का पर्दाफाश हुआ है, जिसकी जड़ें दक्षिण-पूर्व एशिया के ‘गोल्डन ट्रायंगल’ तक फैली हुई हैं। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि इस तस्करी से होने वाली कमाई का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों में किए जाने की भी आशंका है।
कैसे हत्थे चढ़ा अंतरराष्ट्रीय तस्कर?
आरोपी की गिरफ्तारी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रही:
- खुफिया इनपुट: केंद्रीय जांच एजेंसियों को इनपुट मिला था कि एक हाई-प्रोफाइल ड्रग तस्कर नेपाल सीमा से सटे सिक्किम के इलाकों में सक्रिय है।
- घेराबंदी: स्थानीय पुलिस और केंद्रीय खुफिया टीमों ने कई दिनों तक आरोपी की निगरानी की और जब वह अपना ठिकाना बदलने की कोशिश कर रहा था, तब उसे धर दबोचा गया।
- पहचान का संकट: आरोपी ने जाली दस्तावेजों के आधार पर अपनी पहचान छिपाई हुई थी, जिसका खुलासा फॉरेंसिक जांच और बायोमेट्रिक डेटा के मिलान के बाद हुआ।
‘गोल्डन ट्रायंगल’ से जुड़ा है तस्करी का नेटवर्क
जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का अहम हिस्सा है:
- म्यांमार-थाईलैंड कनेक्शन: यह गिरोह म्यांमार, लाओस और थाईलैंड के ‘गोल्डन ट्रायंगल’ क्षेत्र से भारी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स और हेरोइन की तस्करी भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के जरिए करता था।
- समुद्री और सड़क मार्ग: ड्रग्स की खेप को कंटेनरों और गुप्त सड़क मार्गों के जरिए भारत के महानगरों तक पहुँचाया जाता था, जहाँ इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में अरबों रुपये हो जाती थी।
- हवाला और क्रिप्टो: तस्करी के पैसों के लेनदेन के लिए हवाला और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता था ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।
देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा
जांच एजेंसियां अब इस मामले में ‘टेरर फंडिंग’ के एंगल से भी तफ्तीश कर रही हैं:
- नार्को-आतंकवाद: आशंका जताई जा रही है कि 13,000 करोड़ रुपये के इस खेल का एक बड़ा हिस्सा सीमा पार सक्रिय आतंकी समूहों को वित्तपोषित करने के लिए भेजा जा रहा था।
- युवाओं को निशाना: यह सिंडिकेट भारत के सीमावर्ती राज्यों और बड़े शहरों के युवाओं को नशे की लत में झोंककर देश की सामाजिक संरचना को कमजोर करने की साजिश रच रहा था।
निष्कर्ष: आगे की जांच और रिमांड
आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली या मुंबई ले जाया जा सकता है, जहाँ नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य एजेंसियां उससे विस्तार से पूछताछ करेंगी। इस गिरफ्तारी के बाद कई अन्य रसूखदार नामों के सामने आने की भी उम्मीद है जो इस काले कारोबार को संरक्षण दे रहे थे। सिक्किम पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की इस संयुक्त कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि भारत की सीमाएं अब ड्रग तस्करों के लिए सुरक्षित चारागाह नहीं रही हैं।





