Saturday, January 31, 2026

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नितिन गडकरी का बड़ा बयान: ‘जब काम पटरी पर आ जाए, तो पुरानी पीढ़ी को हो जाना चाहिए रिटायर’; नई पौध को कमान सौंपने की वकालत

नई दिल्ली/नागपुर: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर अपने बेबाक और स्पष्टवादी अंदाज से सबको चौंका दिया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि जब कोई संस्थान या काम ठीक से चलने लगे और व्यवस्था सुचारू रूप से स्थापित हो जाए, तो पुरानी पीढ़ी को शालीनता के साथ पीछे हट जाना चाहिए और बागडोर नई पीढ़ी के हाथों में सौंप देनी चाहिए। उन्होंने राजनीति और सामाजिक जीवन में ‘समय पर रिटायरमेंट’ और ‘नए नेतृत्व’ को निखारने पर जोर दिया। गडकरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की राजनीति में अनुभव बनाम युवा जोश को लेकर अक्सर बहस छिड़ी रहती है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी किसे और कैसे सौंपी जानी चाहिए।

किसे सौंपे जिम्मेदारी? गडकरी ने बताया फॉर्मूला

नितिन गडकरी ने केवल रिटायरमेंट की बात नहीं की, बल्कि उत्तराधिकार (Succession) को लेकर एक स्पष्ट विजन भी पेश किया:

  • योग्यता और ऊर्जा: उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी ऐसे युवाओं को सौंपी जानी चाहिए जो न केवल ऊर्जावान हों, बल्कि जिनमें काम को आगे ले जाने की दृष्टि और ईमानदारी हो।
  • मार्गदर्शक की भूमिका: गडकरी के अनुसार, पुरानी पीढ़ी को पूरी तरह हटने के बजाय एक ‘मेंटॉर’ (मार्गदर्शक) की भूमिका में आ जाना चाहिए, ताकि नए लोग उनके अनुभव से सीख सकें और गलतियों से बच सकें।
  • ट्रस्ट और ट्रेनिंग: उन्होंने जोर दिया कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने से पहले उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि काम की गुणवत्ता पर असर न पड़े।

बयान के राजनीतिक और सामाजिक मायने

गडकरी के इस बयान को कई स्तरों पर देखा जा रहा है:

  1. संगठनात्मक बदलाव: विशेषज्ञों का मानना है कि गडकरी का यह सुझाव किसी भी संगठन को गतिशील बनाए रखने के लिए आवश्यक है, ताकि वहां विचारों में जड़ता न आए।
  2. राजनीति में युवाओं की भागीदारी: बीजेपी के भीतर और बाहर, यह बयान उन युवाओं के लिए उत्साहवर्धक माना जा रहा है जो नेतृत्व की कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
  3. स्वस्थ परंपरा की शुरुआत: गडकरी ने संकेत दिया कि सत्ता या पद से चिपके रहने के बजाय, समाज निर्माण के लिए नई पौध को तैयार करना ज्यादा बड़ा और पुण्य का काम है।

गडकरी का अपना कार्य दर्शन

नितिन गडकरी ने हमेशा ‘परफॉर्मेंस’ को राजनीति का असली पैमाना माना है। उन्होंने अपने संबोधन में यह भी जोड़ा:

  • काम बोलता है: जब आप एक सिस्टम को इतना मजबूत बना देते हैं कि वह आपके बिना भी चल सके, वही आपकी असली सफलता है।
  • व्यक्ति नहीं, विचार बड़ा: पद अस्थाई होते हैं, लेकिन आपके द्वारा तैयार किए गए उत्तराधिकारी और आपके विचार ही संस्था को जीवित रखते हैं।

 

नितिन गडकरी के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ कुछ लोग इसे उनके दार्शनिक अंदाज के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ इसे भविष्य के संगठनात्मक बदलावों के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। बहरहाल, गडकरी की यह सलाह कि “पुरानी पीढ़ी को समय रहते नए लोगों के लिए रास्ता बनाना चाहिए”, प्रबंधन और राजनीति दोनों ही क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक मानी जा रही है।

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