हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के जन्म शताब्दी और संगठन के महत्वपूर्ण पड़ाव के उपलक्ष्य में आयोजित शताब्दी समारोह का मंगलवार को औपचारिक शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार और पवित्र ‘ध्वज वंदन’ के साथ हुई, जिसमें देश-विदेश से आए हजारों अनुयायियों ने हिस्सा लिया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गायत्री परिवार के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन न केवल समाज को सही दिशा देते हैं, बल्कि इससे वैश्विक स्तर पर सनातन धर्म की प्रतिष्ठा और गौरव में भी वृद्धि होती है। मुख्यमंत्री ने शांति और सद्भाव के इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं के समर्पण को नमन किया।
ध्वज वंदन और समारोह का आगाज
शताब्दी समारोह की शुरुआत बेहद आध्यात्मिक और अनुशासित वातावरण में हुई:
- पवित्र ध्वजारोहण: गायत्री परिवार के प्रमुखों द्वारा संगठन के पवित्र ध्वज का आरोहण किया गया, जो शांति, ज्ञान और सद्भावना का प्रतीक है।
- शताब्दी संकल्प: इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने समाज सुधार, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण के ‘शताब्दी संकल्प’ को दोहराया।
- वैश्विक उपस्थिति: समारोह में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों सहित भारत के कोने-कोने से गायत्री परिजन हरिद्वार पहुँचे हैं।
मुख्यमंत्री धामी का संबोधन: “संस्कारों की जननी है देवभूमि”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गायत्री परिवार के मानवीय कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
- सनातन का गौरव: सीएम ने कहा कि जब पूरी दुनिया अशांति के दौर से गुजर रही है, तब गायत्री परिवार जैसे संगठन ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के मंत्र से मानवता का कल्याण कर रहे हैं।
- युवाओं को प्रेरणा: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस शताब्दी समारोह के माध्यम से अपनी जड़ों और ऋषि परंपराओं से जुड़ें।
- सरकार का सहयोग: मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और शांतिकुंज जैसे संस्थानों का इसमें बड़ा योगदान है।
अगले पांच दिनों तक चलेगा कार्यक्रमों का सिलसिला
शताब्दी समारोह के तहत शांतिकुंज और ऋषिकुल मैदान में विभिन्न आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है:
- महायज्ञ और ध्यान: प्रतिदिन सामूहिक गायत्री मंत्रोच्चार और विश्व शांति के लिए विशेष आहुतियां दी जाएंगी।
- सांस्कृतिक संध्या: विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं के माध्यम से ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की झलक पेश की जाएगी।
- संगोष्ठियां: वैज्ञानिक अध्यात्मवाद और आधुनिक जीवन में वेदों की प्रासंगिकता पर विद्वानों के बीच चर्चा होगी।
शांतिकुंज में शुरू हुआ यह शताब्दी समारोह केवल एक संगठन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की उस अटूट धारा का प्रतीक है जो सदियों से समाज का मार्गदर्शन कर रही है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने इस आयोजन के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में हरिद्वार में भक्तों का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन और गायत्री परिवार ने व्यापक सुरक्षा व आवास व्यवस्थाएं की हैं।





